जब कोई ग्रह अपनी मौजूदा चाल से उल्टी दिशा की ओर चलने लगता है तो उसे वक्री कहते हैं। 18 अप्रैल से शनि वक्री हो गए हैं और उनकी यह चाल अगले 142 दिन तक रहेगी। इस बीच हर राशि उनकी चाल से प्रभावित होगी। जानें आप पर क्या होगा असर…
नई दिल्ली : अक्षय तृतीया साल का एक ऐसा दिन होता है जब बिना किसी शुभ मुहूर्त के कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। इस 18 अप्रैल को यह शुभ तिथि हुई और इसी के साथ ही शनि धनु राशि में वक्री हो गए। वक्री होने का अर्थ है कि कोई ग्रह अपनी मौजूदा चाल से उलटी दिशा में चलने लगता है। सभी ग्रह वक्री चाल चलना माने जाते हैं लेकिन शनि की वक्री चाल खासतौर पर राशियों के लिए समस्या लेकर आती है। इस साल शनि की वक्री चाल 142 दिन तक अपना असर दिखाएगी।
बता दें कि शनि का यह वक्र 06 सितम्बर 2018 तक रहेगा। इस तरह 18 अप्रैल से 6 सितंबर तक कुल 142 दिन शनि वक्री रहेंगे। वर्तमान में वृश्चिक, धनु और मकर पर शनि की साढ़े साती का प्रभाव है। वृष और कन्या पे ढैया चल रही है। ऐसे इन राशि के जातकों को सावधान रहने की जरूरत है। शनि का व्रकी होना जहां स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है वहीं आसानी से बनने वाले कामों में भी अड़चनें लेकर आती हैं। इस समय जहां मौसम में बदलाव दिखता है वहीं पूरे माहौल में आपाधापी और तनाव महसूस होता है। देखा जाए तो मौजूदा स्थिति को ऐसा ही कहा जाता है।
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जानें शनि के वक्री होने का क्या प्रभाव होता है –
- कारोबार में मंदी का समय रहेगा।
- राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बढ़ेंगे
- मौसम बहुत परिवर्तनशील रहेगा।आंधी तूफ़ान आएगा
- अशांति का माहौल रहेगा
- शेयर बाजार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहेगी
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ज्योतिष के जानकार सुजीत जी महाराज से जानें शनि के वक्री होने का आपकी राशि पर प्रभाव –
- मेष- कठिन समय। संघर्ष करना होगा। शनि के मेष का नवम गोचर आपको परेशान करेगा।
- वृष- अष्टम गोचर स्वास्थ्य खराब करेगा। पारिवारिक तनाव देगा। संघर्ष के बाद सफलता देगा।
- मिथुन- सप्तम गोचर जीवन में सफलता दिलाएगा। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। पारिवारिक जीवन में थोड़ी कठिनाई आएगी।
- कर्क- संघर्ष के बाद सफलता। स्वास्थ्य ख़राब करेगा। विवादों से बचने का प्रयास करें।
- सिंह- स्वास्थ्य में परेशानी। धन का आगमन। व्यय की अधिकता। जॉब में परेशानी। संतान से लाभ।
- कन्या- अशुभ प्रभाव रहेगा। आप ढैया से भी प्रभावित हैं। कोई बड़ी विपत्ति आ सकती है। स्वास्थ्य ख़राब रहेगा।
- तुला- सफलता। शुभ समाचार की प्राप्ति। धन का आगमन। कोई नया व्यापार प्रारम्भ करेंगे।
- वृश्चिक- धन का आगमन। व्यापार में वृद्धि। व्यवसाय में धन का आगमन। शुभ ही शुभ रहेगा
- धनु- प्रथम भाव का गोचर संघर्ष देगा। परिश्रम के बाद सफलता। पारिवारिक जीवन में कठिनाई। मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ेगा।
- मकर- समस्याओं का आगमन। बारहवां गोचर बहुत शुभ नहीं होता। विदेश यात्रा हो सकती है। आय प्राप्ति के स्रोत बढ़ेंगे।
- कुंभ- ग्यारहवां गोचर। बहुत शुभ। धन की प्राप्ति। हर तरफ से सुखद समाचार मिलेंगे। कोई अकस्मात धन मिल जायेगा। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा
- मीन- दशवें गोचर के प्रभाव से कष्ट मिलेगा। व्यय बढ़ेगा। जॉब में परिवर्तन या स्थानांतरण संभव।
शनि के वक्री होने का समय संयम के साथ काटें। शनि का जाप करें और शनिवार को उन पर तेल चढ़ाकर उनकी आरती करें।


