Loading...
loading

Month: October 2018

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

शादी से पहले दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह करेंगे नंदी पूजा

शादी से पहले दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह करेंगे नंदी पूजा, जानें क्‍या है इसमें खास

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
what is nandi puja that deepika padukone and ranveer singh supposed to perform before their wedding

जानें क्‍या होती है नंदी पूजा

नई द‍िल्‍ली : दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी की खूब चर्चा है। इसी बीच खबर आई है कि दोनों सात जन्‍म के बंधन में बंधने से पहले खास नंदी पूजा करेंगे। बता दें क‍ि नंदी बैल को भगवान श‍िव की सवारी कहा जाता है और ये भी मान्‍यता है क‍ि नंदी को मन की बात बता देने से भक्‍तों का संदेश बहुत जल्‍दी भोलेनाथ तक पहुंचता है।

भगवान शिव अपने सर्वत्र विद्यमान भक्तों के प्रत्येक मनोकामना को पूर्ण करने वाले हैं। उनका एक परिवार है जिसे शिव परिवार कहते हैं और इसमें नंदी की बहुत अहम भूमिका है। नंदी भगवान शिव तक अपनी मनोकामना पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। यही कारण है कि भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं उच्चारित करते हैं ताक‍ि ये भगवान शिव तक पहुंच जाएं।

साथ ही नंदी समृद्धि का प्रतीक है। उनकी पूजा से साहस और आत्मबल के साथ साथ श‍िव जी का आशीर्वाद भी मिलता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से यहां जानें नंदी पूजा के लाभ : 

  1. शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति होती है।
  2. विवाह में मंगल दोष को दूर करता है। एक बात स्पष्ट कर दें यदि वर और कन्या में एक मांगलिक है और दूसरा नहीं है तो भी विवाह के पूर्व दोनों की नंदी पूजा करवाई जाती है।
  3. दांपत्य जीवन की सफलता हेतु यह पूजा आवश्यक मानी जाती है।
  4. यदि आप मुकदमों से परेशान हैं तो यह पूजा आपको उससे मुक्ति दिलाएगी।
  5. रोगों से मुक्ति के लिए ये पूजा बहुत सहायक है। भगवान शिव मंदिर में महामृत्युंजय पूजा के साथ-साथ नंदी पूजा भी करनी चाहिए।
  6. मंगल दोष निवारण हेतु नंदी पूजा बहुत लाभकारी है।

क्‍या है नंदी पूजा की व‍िध‍ि
दुग्ध और गंगा जल से नंदी को स्नान कराएं। अक्षत के साथ गुड़ मिलाएं और अर्पित करें। पूजा में फल और फूल भी नंदी देव को चढ़ाए जाते हैं। नंदी स्तुति करें। रुद्राष्टक करने के बाद फिर चंदन से उनके मस्तक का लेपन करें। जो लोग किसी विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु पूजन कर रहे हैं वो अपने मन की आकांक्षा नंदी जी के कान में कहकर उनके चरणों में मस्तक को रखकर सम्पूर्ण समर्पण का भाव रखें। ऐसा करने से उनकी मनोकामना निश्चित तौर पर पूरी होगी।

सावन में कैसे करें शिव पूजा कि विवाह में आने वाली परेशानियां हो जाएं दूर

सावन में कैसे करें शिव पूजा कि विवाह में आने वाली परेशानियां हो जाएं दूर, जानें ये उपाय

आध्यात्म/ज्योतिष

 सुजीत जी महाराज

How to worship shiv ji to get a perfect life partner: यदि आप या फिर आपके किसी प्रियजन के विवाह के मार्ग में बाधाएं आ रही हैं तो, इस सावन के चौथे सोमवार के दिन बताए गए ये उपाय जरूर करें।

sawan

sawan  |  तस्वीर साभार: Instagram

नई दिल्‍ली: श्रावण माह भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव बहुत दयालु और अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। चाहे संतान की प्राप्ति हो, विवाह होना हो या फिर रोगों से मुक्ति पानी हो, तो भगवान शिव की ही याद आती है। भगवान भोलेनाथ मृत्यु तक को टाल सकते हैं।

आजकल विवाह के लिए योग्य वर वधु की तलाश बहुत जोर शोर से कई माध्यमों से की जाती है। यदि आप या फिर आपके किसी प्रियजन के विवाह के मार्ग में बाधाएं आ रही हैं तो, ज्‍योतिष के जानकार सुजीत जी महाराज से जानें कि ये बाधाएं कैसे दूर करें और योग्‍य जीवन साथी की प्राप्ति कैसे करें।

Also read: भद्रा काल में क्यों नहीं बांधी जाती राखी, क्‍या इससे है भाई को खतरा

Sawan shivratri

विवाह में आ रही परेशानियों को ऐसे करें दूर-  

1. भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं। यदि मंदिर नहीं जा सकते हैं तो पार्थिव का शिवलिंग बना कर घर पर ही रुद्राभिषेक कराएं।
2. भगवान शिव का दुग्ध से रुद्राभिषेक कराएं। एक नई बात यह है कि यदि कई फलों के रस से भगवान का अभिषेक करते हैं तो रिश्तों में माधुर्यता आती है।
3. श्रावण मास की एकादशी का व्रत रहें।
4. श्रावण मास में ही शिव भगवान के सामने विवाह का संकल्प लेके सम्पूर्ण श्री रस्म चरितमानस का पाठ करें। तत्पश्चात हवन और भंडारा कराएं या गरीबों में भोजन का दान करें।
5. श्री रामचरितमानस में लिखित शिव पार्वती विवाह प्रसंग को प्रतिदिन प्रातः काल पाठ करें।
6. 108 बेल पत्र पे राम लिखकर प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर अर्पित करें।
7. प्रत्येक सोमवार को धार्मिक पुस्तक का दान करें।
8. कात्यायनी पूजा श्रावण मास में विधिवत करवाने से अति शीघ्र विवाह होता है।

9. माता पार्वती को चुनरी और कुछ आभूषण भी चढ़ाए जाते हैं।
10. श्री राम विवाह का प्रसंग जो कि श्री रामचरितमानस में वर्णित है उसको अपने घर के मंदिर में प्रतिदिन सुनाने से भी अति शीघ्र विवाह होता है।​

Recent Posts

Archives

Categories

Tags

15 जनवरी को मकर संक्रांति Astro Facebook कुछ कार्य बहुत अच्छा भी कर देता है Meditation moon-eclipse Numerology Spiritual significance of Shravan month-- sujeet jee maharaj on india voice tv Tarot Vedicastrology Virgo Zodiac अग्रज श्री जितेंद्र त्रिपाठी सर को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं अयोध्या महोत्सव में आध्यात्मिक लेखन के लिए सम्मान आत्म आनंदित रहने में ही सुख इन राश‍ियों के ल‍िए ला रहा है कष्‍ट उपच्छाया चन्द्रग्रहण कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।मेरे लिखे पूरे लेख को पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में कार्तिक पूर्णिमा की बहुत शुभकामनाएं।आज मेरे लिखे वक्तव्य को पढ़ सकते हैं दैनिक जागरण में। कार्त‍िक पूर्ण‍िमा पर साल का आख‍िरी चंद्र ग्रहण काशी के विद्वान अनुज ज्योतिषियों व तांत्रिकों के साथ खग्रास चन्द्र ग्रहण दिनांक 08 नवम्बर को--सुजीत जी महाराज- गाय हमारी माता है चन्द्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव व दान-- चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से आरम्भ होगा जन्मकुंडली डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह जी को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं तीज 2 सितंबर को ही मनाना उचित रहेगा तुम हकीकत दीपावली 24 अक्टूबर पूजा का शुभ मुहूर्त-- धनतेरस पर राशि अनुरूप करें खरीदारी। पायनियर में मकर संक्रांति में उदया तिथि ली जाती है मार्कण्डेय धाम में पंडित प्रेम गिरी जी का साधना और विश्राम कक्ष मेरा लेख पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में। रहीस मीडिया का सलाहकर बनाने के लिए बहुत बधाई लोगों की प्रगति देखकर बहुत प्रसन्नता वट वृक्ष की पूजा शिव मंदिर में रुद्राभिषेक श्राद्ध के अगले दिन से नवरात्रि पूजा नहीं कर पाएंगे।लगेगा पुरुषोत्तम मास श्री राम कथा संतकबीरनगर की जिलाधिकारी दिव्या मित्तल जी को पुस्तक भेंट करते हुए।साथ में गुरुदेव डॉक्टर हरिद्वार शुक्ल जी सुजीत जी महाराज हरिशयनी एकादशी को व्रत होली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं

Download The App Now!

Google Play App Store

recent