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Month: June 2020

श्राद्ध के अगले दिन से नवरात्रि पूजा नहीं कर पाएंगे, लगेगा पुरुषोत्तम मास

*इस साल का विशेष–

+91 98387 62010 सुजीत जी महाराज 

इस वर्ष अधिक मास लग रहा है।हर साल हम सब श्राद्ध के अगले दिन से नवरात्रि की पूजा शुरू हो जाती है। और कलश स्थापना से लेकर प्रथम देवी की अर्चना शुरू हो जाती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है। इस बार श्राद्ध समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा। अधिकमास लगने से नवरात्रि 28-30 दिन आगे खिसक जाएंगे। इस साल दो महीने अधिकमास लग रहे हैं।

दरअसल लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा।

1.जुलाई 2020 देवशयन एकादशी होगी।01 जुलाई से 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक I

ज्योतिष की मानें तो 160 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं। चतुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। । इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागते हैं।

इस साल श्राद्ध 2 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे।
इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखें जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे।

विष्णु भगवान के निद्रा में जाने से इस काल को देवशयन काल माना गया है। इस समय भगवान विष्णु निद्रा में रहते हैं। चतुर्मास में एक ही स्थान पर गुरु यानी ईश्वर की पूजा करने को महत्व दिया है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इस मास में शिव उपासना का भी विशेष महत्व है।श्री शिवपुराण व विष्णुपुराण पढ़ें।रुद्राभिषेक कराएं।महामृत्युंजय मन्त्र का अनुष्ठान करें।

ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा पर निवास करते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड की सकारात्मक शक्तियों को बल पहुंचाने के लिए व्रत व मन्त्र का बहुत महत्व है। चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की विधिवत पूजा होती है। यह समय तन्त्र पूजा का भी है।बंगलामुखी अनुष्ठान का विशेष शुभ समय है।भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।

सुजीत जी महाराज

+91 98387 62010

Lord Shri Krishna says that attachment to anger

Geeta: Chapter 02 Verse 63

Meaning – Lord Shri Krishna says that attachment to anger or just say that a foolish feeling arises. The stupidity created by anger destroys memory and confuses it. Now it destroys knowledge. Falls far below the position.

Philosophical and Spiritual Meaning – In this verse Lord Krishna has described anger as the origin of all sins. Shri Ramcharitmanas also says that Kama, anger, item, greed are all cults of hell. Anger is a fire in which goodwill burns. In anger, we lose our conscience. We have absolutely no idea what knowledge and ignorance is? We do not know what is appropriately unfair. We can also tell our loved ones in the fire of anger. Enemies believe that anger is the gateway to hell. Bhagavan says that anger creates foolish feelings. The first act of stupidity is the destruction of memory. When memory dies and oblivion begins, the mental state becomes unbalanced. Human imbalance leads to sin. Increasing sin destroys knowledge and devotion. The accumulated sins of many of your births are destroyed. Think that a rage has destroyed both your world and the hereafter. God even says that as a result of anger you fall very low because of your actions. Therefore, there is a message in the simple language of God Krishna that never let anger go.

The relevance of this verse in the present time – In this environment of fear and uncertainty, people’s mental state may deteriorate, due to which the anger is natural. Be present as God keeps you. Say Sita Ram Sita Ram Sita Ram, Rama method should be Rama Tahi method. Situational cognition is essential. Do not let the negative thoughts on your heart and mind take effect. Nothing gives destruction except anger. So, obey the Lord’s order and renounce the anger from today and now. Put your mind in devotion. All will be well.

Sujet jee Maharaj

+91 76074 08742

सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 प्रभाव व उपाय

21 जून का साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण बहुत शुभ नहीं है। ये ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। यह ग्रहण वलयकार होगा, जिसे अंग्रेजी में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण से थोड़ा अलग होता है।
हमारे देश में दिखाई देने के कारण इस ग्रहण का सूतक माना जाएगा। 21 जून को पड़ने वाले इस ग्रहण का असर न केवल हमारे देश बल्कि भारत सहित पड़ोसी देशों में तीव्रता से दिखाई देने के साथ ही विश्व के अन्य देशों पर भी दिखाई देगा।
ये ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र में मिथुन राशि पर होगा। यह ग्रहण लगभग 10 बजकर 32मिनट पर होगा, इसका मध्यकाल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर होगा एवं इसका मोक्ष दोपहर 2 बजकर 2 मिनट पर होगा। ग्रहण की पूरी अवधि लगभग साढ़े 3 घंटे की रहेगी। सूतक 20 जून को रात लगभग 10:10 से ही शुरू हो जाएगा ।सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को खासतौर से सावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।ग्रहण के समय भगवान के नाम का जप करें।सूर्य के बीज मंत्र का जप करें। महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का कम से कम 3 बार पाठ करें।
सूतक काल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार सूतक काल में मूर्ति स्पर्श वर्जित होता है। इस दौरान कोई शुभ काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता। केवल स्नान , दान , मन्त्र जाप व भगवान के नाम का जप के लिए ग्रहण काल उपयुक्त होता है । ग्रहण काल में मन्त्र के जप का पुण्य अनंत गुना होता है ।

ग्रहण का फल

इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव
मेष, कन्या और मकर राशि वालों पर ग्रहण का प्रभाव शुभ रहेगा ।
जबकि वृष व मिथुन को स्वास्थ्य में कष्ट हो सकता है। कर्क, तुला, वृश्चिक व धनु राशि को धन हानि व कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को भी स्वास्थ्य के प्रति बहुत ही सावधान रहना होगा। शेष पर मध्यम मिश्रित असर रहेगा।
इसमें वृश्चिक व मिथुन राशि वालों को विशेष ध्यान रखना होगा।
यह ग्रहण रविवार को होने से और भी प्रभावी हो गया है। इस ग्रहण के अशुभ प्रभाव से प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं। विश्व के कई देश युद्ध की स्थिति में आ सकते हैं। यह ग्रहण बहुत ही अशुभ है। भारत व चीन के मध्य तथा पाकिस्तान से भी युद्ध जैसी स्थिति आ सकती है।
आर्थिक मंदी रहेगी।रोजगार घटेंगे।अपराध में वृद्धि हो सकती है।

उपाय—

इस सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, दान और मंत्र जाप श्राद्ध करना विशेष फलदायी रहेगा। जिन राशि वाले व्यक्तियों के लिए यह कष्टप्रद है वे ग्रहण से सम्बंधित निर्देशों का पालन करें तथा ग्रहणकाल में अपने घर के किसी साफ व शांत स्थान में बैठकर रामरक्षा स्त्रोत , श्री विष्णुसहस्रनाम व महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें । आदित्य हृदय स्त्रोत का 3 बार पाठ करें । जितनी बार हो सके उतनी बार पाठ करें या संख्या का संकल्प लेकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र मन्त्र का जप करें ।
आर्थिक उन्नति के लिए सभी लोग श्री सूक्त का पाठ कर सकते हैं।इस समय जाँब का संकट रहेगा।ग्रहण काल में अपने राशि के स्वामीग्रह के बीज मंत्र का जप अवश्य करें। यदि आप मांगलिक हैं तो मंगल की पूजा करें।कुंडली के नवम व एकादश भाव के स्वामी ग्रह के बीज मंत्र का जप करने से जाँब में प्रोन्नति होगी व नई जाँब मिल भी सकती है।
सुजीत जी महाराज

Lord Shri Krishna talks about conquering the mind

Geeta: Chapter 06 Verse 07sujeet ji

– Lord Shri Krishna talks about conquering the mind in this verse. God Shri Krishna says that the person who has won the mind, that is, whose conscience is completely calm, such Mahatma winter heat, happiness, sorrow and humiliation are the same in all situations because except God, it is a matter of contemplation. Not only.

Philosophical and spiritual interpretation – the mind is the mirror. Every living being seeks happiness. Here, first talk about sense pleasure. Do whatever you like. The tongue is uncontrolled. People like those who eat meat are very well aware that it is killing and it is wrong but they have no control over their tongue. Similarly, other senses commit sin ignorantly. Here God is talking about winning the mind. In very simple words, listening to the voice of the soul is the first step to win the mind. When Maya is subjugated and immersed in material activities, once uncontrolled the mind wanders. Then again and again the mind will be attracted towards material pleasures. Man will have to give the reins to some supreme being. When you surrender your mind to Shri Krishna, then by becoming a Shri Krishna charioteer on your chariot of mind, you will direct your life, then there is no question of sin. You will not be distracted even a little bit. One thing is important: Honor-Aparam. After attaining Shri Krishna devotion, you will remain the same in all the situations and you will be happy in Krishna devotion. Now the question arises that how should all this happen? How to live the mind. First try to attain God. How to achieve that? There are many ways. The most easy and simple path is the devotional path. Now that you have attained God, you will get peace every moment. Now you can enjoy happiness, sorrow, death, fame and other things. You will not be distracted and will continue to attain supreme bliss while indulging in devotion to God.

In the current perspective, the significance of this verse – In this material age, when you get caught in a disaster or pandemic, you also atone for your sins. In the fire of devotion and devotion, sin begins to be cut off. Now you practice situational knowledge. They also start the process of winning the man. The man wins. The senses lose. The devotion of God has calmed the mind, now no condition is affecting you. You will experience unlimited peace.

Sujit ji Maharaj

05 जून को पेनुमब्रल यानी उपच्छाया चंद्रग्रहण–

05 जून को चंद्रग्रहण है।चंद्रग्रहण 5 जून को रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से आरंभ होगा व 6 जून को रात्रि 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण उपच्छाया ग्रहण है। इस ग्रहण से संबंधित किसी भी प्रभाव का असर प्रायः नहीं होता व सूतक का भी असर नहीं होता है।इस दिन चन्द्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करके वहीँ से वापस निकल जाएंगे ।इससे किसी तरह का ग्रास नहीं होगा।इस समय पूर्णिमा तिथि रहती है। ग्रहों के गोचर व दान पुण्य का प्रभाव रहेगा।यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर है।

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15 जनवरी को मकर संक्रांति Astro Facebook कुछ कार्य बहुत अच्छा भी कर देता है Meditation moon-eclipse Numerology Spiritual significance of Shravan month-- sujeet jee maharaj on india voice tv Tarot Vedicastrology Virgo Zodiac अग्रज श्री जितेंद्र त्रिपाठी सर को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं अयोध्या महोत्सव में आध्यात्मिक लेखन के लिए सम्मान आत्म आनंदित रहने में ही सुख इन राश‍ियों के ल‍िए ला रहा है कष्‍ट उपच्छाया चन्द्रग्रहण कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।मेरे लिखे पूरे लेख को पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में कार्तिक पूर्णिमा की बहुत शुभकामनाएं।आज मेरे लिखे वक्तव्य को पढ़ सकते हैं दैनिक जागरण में। कार्त‍िक पूर्ण‍िमा पर साल का आख‍िरी चंद्र ग्रहण काशी के विद्वान अनुज ज्योतिषियों व तांत्रिकों के साथ खग्रास चन्द्र ग्रहण दिनांक 08 नवम्बर को--सुजीत जी महाराज- गाय हमारी माता है चन्द्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव व दान-- चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से आरम्भ होगा जन्मकुंडली डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह जी को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं तीज 2 सितंबर को ही मनाना उचित रहेगा तुम हकीकत दीपावली 24 अक्टूबर पूजा का शुभ मुहूर्त-- धनतेरस पर राशि अनुरूप करें खरीदारी। पायनियर में मकर संक्रांति में उदया तिथि ली जाती है मार्कण्डेय धाम में पंडित प्रेम गिरी जी का साधना और विश्राम कक्ष मेरा लेख पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में। रहीस मीडिया का सलाहकर बनाने के लिए बहुत बधाई लोगों की प्रगति देखकर बहुत प्रसन्नता वट वृक्ष की पूजा शिव मंदिर में रुद्राभिषेक श्राद्ध के अगले दिन से नवरात्रि पूजा नहीं कर पाएंगे।लगेगा पुरुषोत्तम मास श्री राम कथा संतकबीरनगर की जिलाधिकारी दिव्या मित्तल जी को पुस्तक भेंट करते हुए।साथ में गुरुदेव डॉक्टर हरिद्वार शुक्ल जी सुजीत जी महाराज हरिशयनी एकादशी को व्रत होली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं

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