जनक सुता जग जननि जानकी ।अतिसय प्रिय करूनानिधान की।।
ताके जुग पद कमल मनावउँ।जासु कृपा निर्मल मति पावउँ।।
निर्मल बुद्धि प्राप्त करने का ये अचूक महा मंत्र है।
राम ब्रम्ह है।सीता शक्ति।ब्रम्ह और शक्ति का सम्मिलन ही सृष्टि है।माता सीता शक्तिस्वरूपा हैं।शौनकीय तंत्र के अनुसार वे मूल प्रकृति कहलाने वाली आदिशक्ति भगवती हैं,जो इच्छाशक्ति,क्रियाशक्ति और साक्षात शक्ति,इन तीनो रूपों में प्रकट हुई हैं।माता सीता छमा की मूर्ति हैं क्योंकि वह पृथ्वी की पुत्री हैं।श्री हनुमान जी को अजर और अमर बनने के आशीर्वाद देने की शक्ति माता सीता में ही है।हे ममतामयी माता आप राम के पहले आती हैं।हमारी बुद्धि को निर्मल करते हुए हमको श्री राम भक्ति का आशीर्वाद देते हुए हमको तर्क से दूर करते हुए सिर्फ और सिर्फ श्री राम प्रभु की भक्ति प्रदान कीजिये।
जय सीता राम।
श्री सुजीत जी ।


