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शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था मां लक्ष्‍मी का जन्‍म

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday, Kojagra Purnima :

Sharad Purnima 2018 : Devi Laxmi Prakat Diwas  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday : शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी का प्रकटीकरण दिवस कहा जाता है। माता धन की देवी हैं। यश,पद तथा प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। बिना धन की देवी को प्रसन्न किये कोई भी सुख संभव नहीं है। मान्‍यता है क‍ि अगर शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी की व‍िध‍िवत पूजा की जाए तो ये मालामाल होने का वरदान देती हैं।

इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। माता के मंदिर में लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। गरीब बस्तियों में अन्न तथा भोजन का दान करें। गरीबों में वस्त्र बांटें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा मित्रों को भेंट करें। श्री सूक्त, गीता, भागवत, श्री रामचरितमानस, श्री विष्णुसहस्त्रनाम इत्यादि धार्मिक पुस्तकों का दान करें। इतना करने से माता लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न होकर धन तथा वैभव का आशीर्वाद प्रदान करते हुए घर में निवास करेंगी।

Sharad Purnima 2018, How to worship Devi Laxmi 
ज्‍योतिर्व‍िद सुजीत जी महाराज के अनुसार, आज माता को पूजा घर के मंदिर के सुंदर आसन पर विराजमान कराएं। ध्‍यान रखें क‍ि उनके साथ भगवान विष्णु भी हों। माता की पूजा की थाली में पुष्प, अक्षत, रोली, दीपक, हल्दी इत्यादि से सुसज्जित हो। अब घी का एक अखंड दीपक जलाएंगे। ये कम से कम 24 घंटे जलेगा। पहले श्री गणेश उपासना से पूजा आरंभ होगी। फ‍िर मां सहित सभी भगवानों को भोग लगाएंगे। अब माता को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त का पाठ करेंगे।

 

उसमें वर्णित ऋग्वैदिक श्री सूक्तं के 16 मंत्रों का तो बहुत महत्व है। इन मंत्रों से माता को प्रसन्न करके उनको घर में निवास करने की प्रार्थना करेंगे। साथ ही साथ श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ भी करेंगे। विष्णु पूजा भी आवश्यक है। इस दौरान ध्‍यान रखें क‍ि सुगंधित इत्र से पूरा घर महकता हो। सुगंधित धूप बत्ती भी जलाएंगे। अब श्री सूक्त के चमत्कारिक वैदिक मंत्रों से हवन करेंगे। अंत में माता की आरती करके प्रसाद का वितरण करेंगे।

 

 

 

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Karwa Chauth

Karwa Chauth   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Karwa Chauth

Karwa Chauth   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

आध्यात्म/ज्योतिष

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Karwa Chauth

Karwa Chauth   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

महालक्ष्मी व्रत पर इस विधि से करें धन की देवी की आराधना

महालक्ष्मी व्रत पर इस विधि से करें धन की देवी की आराधना, पूरी होगी सारी मनोकामना

आध्यात्म/ज्योतिष

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Mahalaxmi Vrat 2018 Puja Vidhi

Mahalaxmi Vrat 2018: 17 सितंबर 2018 से आरम्भ होने वाले महालक्ष्मी व्रत का आज यानि 2 अक्टूबर का आखिरी दिन है। हिन्दू पंचांग के यह व्रत अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है।

धन की देवी मां लक्ष्‍मी का यह फलदायी व्रत पूरे 16 दिनों तक चलता है। यह व्रत काफी शुभ माना जा है क्‍योंकि इसे पूरे विधि विधान से रखने से घर में सुख शांति और धन की वर्षा होती है। मान्‍यता यह भी है कि इस व्रत को जो भी महिला रखती है उसके घर में कभी कलह नहीं होती।

महालक्ष्मी व्रत का महत्व:
इस व्रत को रखने से धन लाभ तो होता ही है साथ में परिवरजन की सेहत पर भी अच्‍छा असर पड़ता है। बहुत सी महिलाएं इसे पूरे 16 दिन रखती हैं मगर कुछ के लिए यह थोड़ा मुश्‍किल मामला होता है जिस कारण वह इसे मात्र 3 दिन के लिए रखती है। मगर व्रत का आखिरी दिन काफी महत्‍वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। इस व्रत में भोजन नहीं करना चाहिए बल्‍कि फल का सेवन करना चाहिए।

पूजा करने की विधि- 
इस व्रत की एक खास पूजा विधि है। इसमें सबसे पहले पूजा स्‍थान पर हल्‍दी से  कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। फिर मूर्ति के सामने श्रीयंत्र, सोने या चांदी के सिक्के तथा फल फूल रखें। इसके बाद मां लक्ष्‍मी के आठ रूपों का मंत्र जाप करते हुए उन पर कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें।

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

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Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

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Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म

श्री कृष्‍ण का हुआ था रोहिणी नक्षत्र में जन्‍म, जानें कैसे होते हैं इसमें पैदा हुए बच्‍चे

आध्यात्म/ज्योतिष

 टाइम्स नाउ डिजिटल
Janmashtami 2018 sri krishna was born in rohini nakshatra know importance significance details

श्री कृष्‍ण के जन्‍म का नक्षत्र और इसका महत्‍व   |  तस्वीर साभार: Twitter

(श्रीकृष्ण जन्माष्टमी): श्री कृष्ण बचपन में कितने नटखट थे, यह तो हर कोई जानता है। उनकी बाल लीलाओं के चर्चे उस वक्‍त काफी मशहूर हुआ करते थे।  भगवान विष्णु के 8 वें अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का जन्‍म भादों महीने के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्‍में लोग बड़े ही भाग्‍यशाली होते हैं।

श्री कृष्‍ण का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष में अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को बारह बजे हुआ था। रोहिणी का स्वामी शुक्र है। इस नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा जाता है। इस नक्षत्र का शुक्र स्वामी होता है। इस कारण ऐसे लोग संगीत, काव्य और लेखन विधा में अत्यंत प्रवीण होते हैं। इनका दार्शनिक अंदाज सबको मनमोहित करते हुए अपने प्रेम के आगोश में डुबो देता है।

जानें रोहिणी नक्षत्र को 
तमाम नक्षत्र में रोह‍िणी नक्षत्र चौथे नंबर पर आता है। ज्‍योतिष के जानकारी सुजीत जी महाराज कहते हैं क‍ि इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे सुंदर और आकर्षक रोहिणी है।जैसे-जैसे चंद्रमा रोहिणी के सन्निकट जाता है, उसका प्रेम और निखर जाता है और वह उसके प्रेम पाश में एकाकार होकर छुप भी जाती है।

ऐसे में इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है। वह प्रेम और सौंदर्य का पुजारी होता है। उसके व्यक्तित्व में एक अलग प्रकार का आकर्षण होता है। नेत्रों में एक खिचांव और वाणी में चुंबकत्व होता है। साथ ही ऐसे लोग रस वृत्ति और नृत्य के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं।

 

सफलता प्राप्‍त करते हैं रोह‍िणी नक्षत्र में जन्‍मे लोग 
शुक्र विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण और कई प्रेम संबंध बनाता है। ऐसे जातक के प्रायः प्रेम विवाह होते हैं। वैसे इनके खूब अफेयर्स भी होते रहते हैं। फ‍िल्म के फील्ड में इस नक्षत्र के लोग बहुत सफल होते हैं। अभिनय के साथ साथ यह नक्षत्र व्‍यक्‍त‍ि को उच्च कोटि का लेखक और संगीतकार बनाता है।

ये राजनीति में प्रायः संगठन में रहते हैं और बहुत अच्छे नेतृत्व कर्ता होते हैं। इनके अंदर सफलता प्राप्ति के लिए कूटनीतिक दूरदर्शिता विद्यमान होती है।शुक्र वित्त का भी ग्रह है और कम्प्यूटर का कारक ग्रह भी है। यह प्रबंधकीय कौशल भी प्रदान करता है। अतः इस फील्ड में इस रोहिणी के जातक बहुत नाम कमाते हैं।

 

रोहिणी में जन्म लेने वाले जातक यात्रा बहुत करते हैं। इनकी विदेश यात्राएं खूब होती हैं और खुद भी ये घूमने के शौकीन होते हैं। प्रशासन तथा राजनीति में किसी बड़े पद पर पहुंचते हैं। इस प्रकार रोहिणी में जन्म लेने वाले लोगों को जीवन में समस्त सुख प्राप्त होते हैं।

सावन में कैसे करें शिव पूजा कि विवाह में आने वाली परेशानियां हो जाएं दूर

सावन में कैसे करें शिव पूजा कि विवाह में आने वाली परेशानियां हो जाएं दूर, जानें ये उपाय

आध्यात्म/ज्योतिष

 सुजीत जी महाराज

How to worship shiv ji to get a perfect life partner: यदि आप या फिर आपके किसी प्रियजन के विवाह के मार्ग में बाधाएं आ रही हैं तो, इस सावन के चौथे सोमवार के दिन बताए गए ये उपाय जरूर करें।

sawan

sawan  |  तस्वीर साभार: Instagram

नई दिल्‍ली: श्रावण माह भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव बहुत दयालु और अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। चाहे संतान की प्राप्ति हो, विवाह होना हो या फिर रोगों से मुक्ति पानी हो, तो भगवान शिव की ही याद आती है। भगवान भोलेनाथ मृत्यु तक को टाल सकते हैं।

आजकल विवाह के लिए योग्य वर वधु की तलाश बहुत जोर शोर से कई माध्यमों से की जाती है। यदि आप या फिर आपके किसी प्रियजन के विवाह के मार्ग में बाधाएं आ रही हैं तो, ज्‍योतिष के जानकार सुजीत जी महाराज से जानें कि ये बाधाएं कैसे दूर करें और योग्‍य जीवन साथी की प्राप्ति कैसे करें।

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Sawan shivratri

विवाह में आ रही परेशानियों को ऐसे करें दूर-  

1. भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं। यदि मंदिर नहीं जा सकते हैं तो पार्थिव का शिवलिंग बना कर घर पर ही रुद्राभिषेक कराएं।
2. भगवान शिव का दुग्ध से रुद्राभिषेक कराएं। एक नई बात यह है कि यदि कई फलों के रस से भगवान का अभिषेक करते हैं तो रिश्तों में माधुर्यता आती है।
3. श्रावण मास की एकादशी का व्रत रहें।
4. श्रावण मास में ही शिव भगवान के सामने विवाह का संकल्प लेके सम्पूर्ण श्री रस्म चरितमानस का पाठ करें। तत्पश्चात हवन और भंडारा कराएं या गरीबों में भोजन का दान करें।
5. श्री रामचरितमानस में लिखित शिव पार्वती विवाह प्रसंग को प्रतिदिन प्रातः काल पाठ करें।
6. 108 बेल पत्र पे राम लिखकर प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर अर्पित करें।
7. प्रत्येक सोमवार को धार्मिक पुस्तक का दान करें।
8. कात्यायनी पूजा श्रावण मास में विधिवत करवाने से अति शीघ्र विवाह होता है।

9. माता पार्वती को चुनरी और कुछ आभूषण भी चढ़ाए जाते हैं।
10. श्री राम विवाह का प्रसंग जो कि श्री रामचरितमानस में वर्णित है उसको अपने घर के मंदिर में प्रतिदिन सुनाने से भी अति शीघ्र विवाह होता है।​

अक्षय तृतीया 2018 : 24 घंटे मुहूर्त का संयोग

अक्षय तृतीया को बेहद शुभ द‍िन माना जाता है। जानें इस द‍िन का महत्‍व और उपाय जो आपको धन लाभ द‍िला सकता है –

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अक्षय तृतीया के दिन दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता

नई द‍िल्‍ली : वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को ही अक्षय तृतीया कहते हैं। इस बार अक्षय तृतीया का महापर्व 18 अप्रैल को है। इस दिन मांगलिक कार्य, मुंडन, शादी विवाह, बहू का प्रथम बार चौका छूना, दूकान की ओपनिंग व्यापार का प्रारंभ और सारे शुभ कार्य किए जाते हैं। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया सुबह 04:47 बजे से प्रारम्भ होगी और रात्रि 03:03 मिनट तक इसका मुहूर्त रहेगा। खास बात ये है कि इस वर्ष पूरे 24 घंटे का आपको शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है जो कि बहुत ही सौभाग्य की बात है।

यह माह गर्मी का होता है और माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता। उसका फल आपको इस जन्म के साथ साथ कई जन्मों तक मिलता रहता है। इस दिन लोगों को मीठा खिलाएं और शीतल जल पिलाएं। साथ ही गर्मी से बचने के ल‍िए जरूरतमंदों को छाता, घट और पंखे का दान करें। मंदिरों में वॉटर कूलर लगवाएं और भंडारा करवाते हुए मिठाई खिलाइएं। इससे आपको बहुत पुण्य की प्राप्ति होगी जिसका कभी क्षय नहीं होगा।

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ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज कहते हैं क‍ि अक्षय तृतीया को श्री विष्णु भगवान की पूजा माता लक्ष्मी के साथ साथ करना चाहिए। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ और श्री सूक्त का पाठ जीवन में धन, यश, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति कराएगा। अक्षय तृतीया की पूजा के ल‍िए भगवान विष्णु को पीला पुष्प अर्पित करें और पीला वस्त्र धारण कराके घी के 9 दीपक जलाकर पूजा प्रारम्भ करें। जो लोग बीमारियों से ग्रस‍ित हैं उनको आज के दिन आरी राम रक्षा स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

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अक्षय तृतीया के द‍िन चांदी के सिक्के और स्वर्ण आभूषणों की खरीददारी करिए। नए वस्त्र धारण करिए और मंदिर में अन्न और फल का दान करिए। अस्पतालों में मीठा,जल और फल का वितरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन अपने मित्रों को और विद्वानों को धार्मिक पुस्तक का दान करने से देव गुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं। विद्यार्थियों को इस दिन कठिन परिश्रम का प्रतिज्ञा करना चाहिए। छात्रों को दृढ़ संकल्पित होकर आज ईश्वर के सामने यह संकल्प लेना चाहिए कि हम आज से कठिन परिश्रम करेंगे और माता पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ साथ गुरु का भी आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए क्योंकि माता, पिता और गुरु का आशीर्वाद आज के दिन अनंत गुना फलदायी होता है।

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इस दिन श्री रामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करना चाहिए। इस काण्‍ड में भगवान राम ऋषियों और महान संतों को दर्शन देते हैं और उनके जन्म जन्मान्तर के पुण्य का फल प्रदान करते हैं। इस काण्ड का पाठ करने से भगवान श्री राम की भक्ति प्राप्त होती है। अक्षय तृतीया आपके लिए वह सुअवसर है जिससे आपके जीवन की दिशा और दशा ही तय हो जायेगी। इस दिन संकल्प लें कि हम कर्म की पराकाष्ठा और अपने जीवन में अच्छे कर्मों का समावेश करेंगे।

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