आशा की किरणों में ही भविष्य का शिशु पलता है।सूर्य आत्मा है।चंद्रमा मन।सूर्य स्थिर है क्योंकि उसे सृष्टि का संचालन अपने नेत्रों से देखना है।वह ऐसा देवता है जो हमें दिखता है।अनंत आकाश में अपना वैभव दिखाते हुए तथा समस्त तम के साम्राज्य का विनाश करते हुए शिव की भांति कल्याणकारी सूर्य को प्रणाम करते रहें।ज्योतिष में सूर्य आत्मा है इसीलिए आत्मा को ऊर्जा का अनंत स्रोत माना गया है।सूर्य में विभेद नहीं है।वह सबके लिए बराबर है।चंद्रमा की गति तेज है इसलिए वो मन है तथा भगवान शिव के मस्तक पर जाकर वंदनीय हो गया।भास्कर को जल अर्पित करते रहें तथा उससे विनती करें कि हमें कुछ अपनी ऊर्जा की भिक्षा दे दो जिससे कि हमारी आत्मा में कुछ प्रकाश आ सके जो हम इस समाज तथा आध्यात्म को दे सकें। स्मरण रहे जिनके विचार में सब बराबर हैं वही सूर्य का तथा इस सृष्टि को बनाने वाले का सच्चा उपासक है।
सुजीत जी महाराज।


