दिनांक 15 जून अर्थात मिथुन संक्रांति।पुण्य प्राप्ति का महान अवसर।अपने कर्म को करते हुए श्री कृष्ण चरणों में सम्पूर्ण कर्मों को समर्पित करते हुए श्री हरि चरणों में समर्पण ही भगवान की सबसे अच्छी सेवा है।सूर्य एक राशि में एक माह रहते हैं।इस बार 15 जून को भगवान आदित्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।प्रत्येक राशि के स्वामी ग्रह होते हैं।इस दिन पवित्र नदी का स्नान कर राशि के द्रव्यों का दान करें।श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें।प्रातः उठकर सूर्य प्रणाम करें।किसी की निंदा मत करें।सबसे प्रेम करें।सूर्य आत्मा है।पिता का कारक ग्रह है।मिथुन का स्वामी ग्रह बुध है।सूर्य का बुध की राशि में आना एक शुभ संकेत होता है।वाणी को बुध प्रभावित करता है।जितना मीठा बोलेंगे।मन को निर्मल करेंगे।माता ,पिता और गुरु का सम्मान करते हुए श्री हरि नाम संकीर्तन करेंगे आपको उतना ही पुण्य प्राप्त होगा।पुण्य का संचय ही तो मानव जीवन का असली bank balance है जो हमारी रक्षा करता है।आइए इस महान संक्रांति का लाभ उठाएं।
जय सीता राम।
श्री सुजीत जी


