ॐ नमः शिवाय।पुरुषोत्तम मास और सोमवार का दिन शिव उपासना के लिए बहुत उत्तम अवसर है।शिव कल्याणकारी हैं।दयालु हैं।बहुत बड़े दानी हैं।जल्द प्रसन्न होने वाले हैं।श्री राम के प्रिय ईश्वर हैं।कष्टों को हरने वाले और विध्नों को समाप्त करने वाले हैं।वैराग्य हैं।समाधि हैं।सर्वाधिक पूज्यनीय हैं।भगवान राम तो शिव के अनन्य भक्त हैं।शिव उपासना के बिना जीवन व्यर्थ है।भगवान भोले नाथ का जलाभिषेक करें।श्री राम कथा इनको बहुत प्रिय है।रोग से ग्रस्त लोग कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष फलदायी है।बहुत ही सहज और सरल तरीके से मन की निर्मलता बनाये हुए भक्ति भाव से की गई निष्काम पूजा ही सबसे अच्छी मानी गई है।भगवान राम की सहजता और विनम्रता को देखिए।निर्भयता तभी रहेगी जब हम ईश्वर पे सब कुछ छोड़ देंगे।भगवान कृष्ण भी गीता के 18 वें अध्याय के अंत तक आते आते सम्पूर्ण समर्पण की बात कहते कहते सर्वधर्मनपरित्यजयः तक की बात कहके मामेकं शरणं व्रजः तक की बात अर्जुन से कह डाले।
आइए सहजता बनाये रखें।किस बात का अहंकार।जब सब उसी शिव का दिया हुआ है और जब वो चाहेगा ले लेगा तो कैसा अहंकार।याद रहे मृत्यु को हमेशा याद करने से भगवान के प्रति प्रेम बढ़ जाता है।पुण्य प्रारम्भ हो जाते हैं।श्मसान घाट अवश्य जाना चाहिए वहां जाके शरीर की नश्वरता का बोध होता है।शिव जगाते हैं।शिव सत्य हैं।शिव सुंदर हैं।शिव इह लोक और पर लोक दोनों को ठीक करते हैं।
ॐ नमः शिवाय
श्री सुजीत जी।


