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Month: October 2018

करवा चौथ पर सुहागन स्त्रियां भूल से भी ना करें ये काम

Karwa Chauth 2018: करवा चौथ पर सुहागन स्त्रियां भूल से भी ना करें ये काम, हो सकता है पति को नुकसान

आध्यात्म/ज्योतिष

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Karwa Chauth 2018 date time, karva chauth what not to do

Karva Chauth : जानें करवा चौथ के न‍ियम

Karwa Chauth 2018 date time, karva chauth what not to do : सुहागन महिलाओं का बड़ा पर्व करवा चौथ इस माह 27 अक्‍टूबर को मनाया जा रहा है। इस द‍िन शन‍िवार है। वहीं इसी द‍िन इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी होने से ये पर्व और भी शुभ हो गया है। इस द‍िन विवाहित मह‍िलाओं के लिए 16 श्रृंगार को महत्‍वपूर्ण माना गया है। इसके बाद शाम को चांद की पूजा करने के बाद मह‍िलाएं पति के हाथ से जल ग्रहण करने के बाद ही व्रत पूर्ण करती हैं। लेकिन हर व्रत की तरह करवा चौथ के भी कुछ न‍ियम हैं। अगर इनका ध्‍यान न रखा जाए तो व्रत का पूरा फल प्राप्‍त नहीं होता है।

करवा चौथ का व्रत अब कई मह‍िलाएं व कन्‍याएं करने लगी हैं। ऐसे में इसके न‍ियमों को ज्ञात करना आवश्‍यक है। ऐसा न हो क‍ि आप एक ओर व्रत करें और दूसरी ओर कोई भूल इस व्रत का सारा पुण्‍य भी खत्‍म कर दे। ये व्रत सुहाग से जुड़ा है, लिहाजा इससे जुड़ी चूकों पर ध्‍यान देना आवश्‍यक है। इन बातों को जानें ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से।

What not to do on Karwa Chauth 2018 : करवा चौथ पर सुहागनें ना करें ये काम

  • इस दिन महिलाएं काले वस्त्र का प्रयोग मत करें। एकदम सफेद साड़ी भी नहीं पहननी चाहिए। काला रंग सुहागिन महिलाओं के लिए अशुभ फलदायी है। सफेद साड़ी भी शुभ पर्व पर सुहागिन स्त्रियां नहीं पहनती हैं।
  • इस दिन कैंची का प्रयोग मत करें। कपड़े मत काटें। अक्सर महिलाएं कपड़े काटने में कैंची का प्रयोग करती हैं। इस दिन भूलकर भी कैंची का प्रयोग ही मत करें बल्कि उसे कहीं छुपा दें ताकि वो दिखे भी नहीं।
  • सिलाई-कढ़ाई भी मत करें। व्रत के दौरान खाली समय को व्यतीत करने के लिए व्रत के दिन अक्सर महिलाएं सिलाई कढ़ाई या स्वेटर बुनने का काम करती हैं। आज के दिन ये से सभी कार्य प्रतिबंधित है।
  • इस दिन समय बिताने के लिए ताश के पत्ते मत खेलें। जुआ तो कदापि मत खेलें। अपने समय को संगीत और भजन में बिताएं।
  • किसी की निंदा मत करें। किसी की चुगली या बुराई करने से व्रत का फल नहीं मिलता।
  • दूध, दही, चावल या उजला वस्त्र दान मत करें।
  • अपने से बड़ों का निरादर मत करें।
  • पति के अलावा किसी का चिंतन किसी भी स्थिति में मत करें।
  • सुहाग की वस्तुएं कचड़े में मत फेंके।
  • श्रृंगार करते समय जो चूड़ियां टूट जाये उनको बहते जल में प्रवाहित करें न कि घर में रखें।
  • इस दिन धूम्रपान मत करें। किसी भी प्रकार का किया गया नशा व्रत के पुण्य का नाश कर देगा।
  • तामसिक भोजन मत करें।
  • पति से प्यार से बाते करें। कोई विवाद मत करें। यदि कोई विवाहित महिला सभी नियमों के पालन से निराजल व्रत भी रहती है और पति को डांटती या अपमान करती है तो उसका सारा व्रत बेकार हो जाता है।

 

इस प्रकार करवा चौथ एक बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन का सदुपयोग करें। लाल या नारंगी, हरी, पीली साड़ी पहनें। पूरा दिन महिलाएं अपने में संगीत का आनन्द लें। सोलह श्रृंगार करें। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्‍यान करें। अपने आपको पति के प्रेम में समर्पित करें।

शरद पूर्णिमा पर चंद्र संबंधी दोष दूर करने के लिए राशि अनुसार करें ये बेहतरीन उपाय

Sharad Purnima 2018 : शरद पूर्णिमा पर चंद्र संबंधी दोष दूर करने के लिए राशि अनुसार करें ये बेहतरीन उपाय

आध्यात्म/ज्योतिष

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Sharad Purnima 2018, Chandra Dosh ke Upay : कुंडली में राहु और केतु के साथ होने पर चंद्रमा को दोषी कहा जाता है। अगर आपके साथ ऐसा है तो शरद पूर्णिमा पर श‍िव पूजन जरूर करें।

Sharad Purnima 2018, Chandra Dosh ke Upay, kojagra purnima

How to remove Chandra Dosh on Sharad Purnima   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Sharad Purnima 2018, Chandra Dosh ke Upay : शरद पूर्णिमा को चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में रहते हैं। चंद्रमा से मन, धर्म और आध्यात्म का विचार करते हैं। चंद्रमा जिस अंक पर होता है, उसी से राशि का निर्धारण भी होता है। जन्मकुंडली में लग्न चक्र के अलावा चंद्र कुंडली भी होती है। बता दें क‍ि गोचर सिद्धांत चंद्र कुंडली से ही देखते हैं। ज्‍योतिष में माना जाता है क‍ि पंचम और नवम भाव में चंद्रमा लग्न बहुत अच्छा परिणाम देता है। यदि यह केंद्र में गुरु के साथ है तो गजकेसरी नाम का राजयोग बनाता है। वहीं नवम भाव का चंद्रमा धर्म और ज्ञान के लिए बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है।

ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज के अनुसार, यदि यही चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में है तो नकारात्मक प्रभाव देता है। 6ठे भाव का चंद्रमा रोग देता है। अष्टम भाव में उम्र को प्रभावित करेगा और बारहवें व्यय भाव में जातक को बहुत इमोशनल बनाता है। इसलिए ऐसे जातकों को शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के बीज मंत्र ॐ सों सोमाय नमः का जप करना चाहिए और दूध से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिए।

 

यदि चंद्रमा कुंडली में कहीं से भी राहु या केतु के साथ स्थित है तो यह दोषपूर्ण माना जायेगा। ऐसी स्थिति में शिव पूजा अत्यंत आवश्यक है। इस परिस्थिति में राहु और केतु के द्रव्यों जैसे क‍ि उड़द, तिल, काला कम्बल इत्यादि का दान करना चाहिए और साथ ही चंद्रमा के बीज मंत्र का जाप करवाना चाहिए। चंद्रमा को ठीक करने का सबसे सहज और सरल उपाय है भगवान शिव की पूजा। ये सारे उपाय शरद पूर्णिमा को करने से लाभ की प्रत्याशा बढ़ जाती है।

 

चंद्र दोष दूर करने के राशि अनुसार ये हैं शरद पूर्णिमा के उपाय

  1. मेष : शहद से भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं।
  2. वृष : भगवान शिव का इत्र और गंगाजल से जलाभिषेक करें।
  3. मिथुन : श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। कुशोदक से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें।
  4. कर्क : इस राशि का स्वामी ही चंद्रमा है। चंद्रमा के बीज मंत्र का जप करें।
  5. सिंह : श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। शहद और गंगा जल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  6. कन्या : श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। दही और गंगा जल भगवान शिव को अर्पित करें।
  7. तुला : ठाकुर श्री विष्णु जी को तुलसी का पत्ता अर्पित करें। श्री सूक्त का पाठ करें।
  8. वृश्चिक : मोती की माला धारण करें। भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक कराएं।
  9. धनु : श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
  10. मकर : चांदी का चंद्रमा शिवलिंग पर अर्पित करें। सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।
  11. कुंभ : चंद्रमा के बीज मंत्र के साथ साथ शनि के मंत्र का भी जप करें।
  12. मीन : फलों के रस से भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।

इस प्रकार शरद पूर्णिमा पुण्य प्राप्ति का महान अवसर प्रदत्त करती है। अपने भक्ति भाव को श्री हरि चरणों में समर्पण का यह एक सुन्दर अवसर है।

शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से बरसता है अमृत

Sharad Purnima 2018: शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से बरसता है अमृत, जानें इस रात क्‍यों बनाई जाती है खीर

Sharad Purnima 2018 Kheer Prasad : शरद पूर्ण‍िमा पर खीर के प्रसाद का बहुत महत्‍व है। जानें कब इसे चांद की रोशनी में रखा जाना चाहिए और कब इसका प्रसाद ग्रहण करें

Sharad Purnima 2018 Kheer Prasad

Sharad Purnima : Significance of Kheer Prasad  |  तस्वीर साभार: YouTube

Sharad Purnima 2018 Kheer Prasad : आश्विन मास की पूर्णिमा को ही  ही शरद पूर्णिमा माना गया है। ऐसी मान्‍यता है क‍ि शरद पूर्णिमा की रात्रि चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है। वैसे इसकी भी एक खास वजह है। दरअसल खीर दूध से बनी होती है और दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करते हैं। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा से निकलने वाली किरणों में सभी रोगों की दवा होती हैं।

आयुर्वेद के हिसाब से जब चंद्र किरणें शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर पर पड़ती हैं तो सभी प्रकार की व्याधियों का नाश होता है। वैसे इस रात्रि जागने की परंपरा भी है। यह पूर्णिमा जागृति पूर्णिमा के नाम से भी जानी जाती है। इस रात्रि चंद्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होता है।

Sharad Purnima 2018 How to Keep Kheer as Prasad 
खीर बनाकर उसे एक मीड‍ियम आकार के बर्तन में रखें। इसे एक पतले सूती कपड़े से बांधकर छलनी से ढक दें। इस खीर को पूरी रात्रि रखते हैं वो भी खुली आसमान के नीचे, छत पर या किसी उपवन में। जहां भी खीर को रखा जाता है, वहां एक उत्सव का वातावरण बनाकर भजन कीर्तन करते हैं। इस रात्रि श्री विष्णु पूजा की जाती है। वहीं 16 कलाओं से पूर्ण श्री कृष्ण उपासना का भी विधान है।

 

अगले दिन प्रातः इस खीर को भगवान विष्णु को निवेदित करके अर्थात भोग लगाकर पुनः इसका सेवन किया जाता है और भक्तों में इस महा प्रसाद का वितरण होता है। चंद्रमा सांस और कफ के रोग का कारक ग्रह है अर्थात यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा दूषित है तो आप कफ और श्वांस रोग से पीड़ित रहेंगे। ऐसी स्थिति में इनसे प्रभावित जातकों के लिए यह खीर अमृत के समान है। इस रात्रि चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है और इसकी किरणें सीधे धरती तक पहुंचती हैं। इसी कारण इस किरण में घुले सभी अमृत तत्व आसानी से खीर में घुल जाते हैं।

Sharad Purnima 2018 When to Keep Kheer as a Prasad
जैसे ही चांद की रोशनी धरती पर पड़ने लगे या उस जगह, जहां आप खीर रखने वाले हैं – तो तुरंत ही कटोरी में खीर डाल कर व‍िध‍ि पूर्वक उसे पूर्ण‍िमा के चांद की रोशनी में रख दें। इसके बाद जाप और पूजन करें। रात्र‍ि 12 बजे के बाद आप खीर को उठाकर उसका प्रसाद बांटें। शरद पूर्ण‍िमा का समय इस तरह है :

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 23 अक्‍टूबर 2018 की रात 10:36 मिनट
  • पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 24 अक्‍टूबर की रात 10:14 मिनट

Sharad Purnima 2018 Spritual Significance 
इस खीर का आध्यात्मिक महत्व यह है कि इसे ग्रहण करने से मन को शीतलता प्राप्त होती है। चंद्रमा पूर्ण कला में है मतलब मन की ग्राह्यता सम्पूर्ण है। मन जब पूर्णतया ईश्वर के चरणों में या भक्ति में समर्पित होता है तो वही भक्ति की सर्वोच्च अवस्था होती है। यही बात श्री कृष्ण जी गीता के 18 वें अध्याय के अंत में कहते हैं कि सर्वधर्माणपरित्यजयः मामेकम शरणम व्रजः अहं तवां सर्वपापेभ्यो मोक्ष यस्यामि मा शुचः।।

यही भक्ति की पराकाष्ठा है। शरणागति ही धर्म है। पूर्णिमा सौंदर्य है। मन का रास है।गोपियों का अपने कृष्ण के प्रति रास है।गो मतलब इन्द्रिय ,मतलब पीना।जो इंद्रियों को पी जाय अर्थात वासना को पी कर वैराग्य से और ब्रम्हचर्य से परिपूर्ण होकर श्री कृष्ण प्रेम में गाये और नृत्य करे वही सर्वोच्च भक्ति है। इस प्रकार यह पूर्णिमा अपने मन को श्री कृष्ण भक्ति में पूर्ण समर्पण का है और वह खीर उस रास का प्रसाद है। इस महापर्व का पूर्णतया लाभ उठाएं।

शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था मां लक्ष्‍मी का जन्‍म

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday, Kojagra Purnima :

Sharad Purnima 2018 : Devi Laxmi Prakat Diwas  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday : शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी का प्रकटीकरण दिवस कहा जाता है। माता धन की देवी हैं। यश,पद तथा प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। बिना धन की देवी को प्रसन्न किये कोई भी सुख संभव नहीं है। मान्‍यता है क‍ि अगर शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी की व‍िध‍िवत पूजा की जाए तो ये मालामाल होने का वरदान देती हैं।

इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। माता के मंदिर में लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। गरीब बस्तियों में अन्न तथा भोजन का दान करें। गरीबों में वस्त्र बांटें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा मित्रों को भेंट करें। श्री सूक्त, गीता, भागवत, श्री रामचरितमानस, श्री विष्णुसहस्त्रनाम इत्यादि धार्मिक पुस्तकों का दान करें। इतना करने से माता लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न होकर धन तथा वैभव का आशीर्वाद प्रदान करते हुए घर में निवास करेंगी।

Sharad Purnima 2018, How to worship Devi Laxmi 
ज्‍योतिर्व‍िद सुजीत जी महाराज के अनुसार, आज माता को पूजा घर के मंदिर के सुंदर आसन पर विराजमान कराएं। ध्‍यान रखें क‍ि उनके साथ भगवान विष्णु भी हों। माता की पूजा की थाली में पुष्प, अक्षत, रोली, दीपक, हल्दी इत्यादि से सुसज्जित हो। अब घी का एक अखंड दीपक जलाएंगे। ये कम से कम 24 घंटे जलेगा। पहले श्री गणेश उपासना से पूजा आरंभ होगी। फ‍िर मां सहित सभी भगवानों को भोग लगाएंगे। अब माता को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त का पाठ करेंगे।

 

उसमें वर्णित ऋग्वैदिक श्री सूक्तं के 16 मंत्रों का तो बहुत महत्व है। इन मंत्रों से माता को प्रसन्न करके उनको घर में निवास करने की प्रार्थना करेंगे। साथ ही साथ श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ भी करेंगे। विष्णु पूजा भी आवश्यक है। इस दौरान ध्‍यान रखें क‍ि सुगंधित इत्र से पूरा घर महकता हो। सुगंधित धूप बत्ती भी जलाएंगे। अब श्री सूक्त के चमत्कारिक वैदिक मंत्रों से हवन करेंगे। अंत में माता की आरती करके प्रसाद का वितरण करेंगे।

 

 

 

शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था मां लक्ष्‍मी का जन्‍म

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday, Kojagra Purnima :

Sharad Purnima 2018 : Devi Laxmi Prakat Diwas  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday : शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी का प्रकटीकरण दिवस कहा जाता है। माता धन की देवी हैं। यश,पद तथा प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। बिना धन की देवी को प्रसन्न किये कोई भी सुख संभव नहीं है। मान्‍यता है क‍ि अगर शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी की व‍िध‍िवत पूजा की जाए तो ये मालामाल होने का वरदान देती हैं।

इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। माता के मंदिर में लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। गरीब बस्तियों में अन्न तथा भोजन का दान करें। गरीबों में वस्त्र बांटें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा मित्रों को भेंट करें। श्री सूक्त, गीता, भागवत, श्री रामचरितमानस, श्री विष्णुसहस्त्रनाम इत्यादि धार्मिक पुस्तकों का दान करें। इतना करने से माता लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न होकर धन तथा वैभव का आशीर्वाद प्रदान करते हुए घर में निवास करेंगी।

Sharad Purnima 2018, How to worship Devi Laxmi 
ज्‍योतिर्व‍िद सुजीत जी महाराज के अनुसार, आज माता को पूजा घर के मंदिर के सुंदर आसन पर विराजमान कराएं। ध्‍यान रखें क‍ि उनके साथ भगवान विष्णु भी हों। माता की पूजा की थाली में पुष्प, अक्षत, रोली, दीपक, हल्दी इत्यादि से सुसज्जित हो। अब घी का एक अखंड दीपक जलाएंगे। ये कम से कम 24 घंटे जलेगा। पहले श्री गणेश उपासना से पूजा आरंभ होगी। फ‍िर मां सहित सभी भगवानों को भोग लगाएंगे। अब माता को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त का पाठ करेंगे।

 

उसमें वर्णित ऋग्वैदिक श्री सूक्तं के 16 मंत्रों का तो बहुत महत्व है। इन मंत्रों से माता को प्रसन्न करके उनको घर में निवास करने की प्रार्थना करेंगे। साथ ही साथ श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ भी करेंगे। विष्णु पूजा भी आवश्यक है। इस दौरान ध्‍यान रखें क‍ि सुगंधित इत्र से पूरा घर महकता हो। सुगंधित धूप बत्ती भी जलाएंगे। अब श्री सूक्त के चमत्कारिक वैदिक मंत्रों से हवन करेंगे। अंत में माता की आरती करके प्रसाद का वितरण करेंगे।

 

 

 

शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था मां लक्ष्‍मी का जन्‍म

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday, Kojagra Purnima :

Sharad Purnima 2018 : Devi Laxmi Prakat Diwas  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Sharad Purnima 2018, Devi Laxmi Birthday : शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी का प्रकटीकरण दिवस कहा जाता है। माता धन की देवी हैं। यश,पद तथा प्रतिष्ठा प्रदान करती हैं। बिना धन की देवी को प्रसन्न किये कोई भी सुख संभव नहीं है। मान्‍यता है क‍ि अगर शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्‍मी की व‍िध‍िवत पूजा की जाए तो ये मालामाल होने का वरदान देती हैं।

इस दिन दान अवश्य करना चाहिए। माता के मंदिर में लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। गरीब बस्तियों में अन्न तथा भोजन का दान करें। गरीबों में वस्त्र बांटें। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की प्रतिमा मित्रों को भेंट करें। श्री सूक्त, गीता, भागवत, श्री रामचरितमानस, श्री विष्णुसहस्त्रनाम इत्यादि धार्मिक पुस्तकों का दान करें। इतना करने से माता लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न होकर धन तथा वैभव का आशीर्वाद प्रदान करते हुए घर में निवास करेंगी।

Sharad Purnima 2018, How to worship Devi Laxmi 
ज्‍योतिर्व‍िद सुजीत जी महाराज के अनुसार, आज माता को पूजा घर के मंदिर के सुंदर आसन पर विराजमान कराएं। ध्‍यान रखें क‍ि उनके साथ भगवान विष्णु भी हों। माता की पूजा की थाली में पुष्प, अक्षत, रोली, दीपक, हल्दी इत्यादि से सुसज्जित हो। अब घी का एक अखंड दीपक जलाएंगे। ये कम से कम 24 घंटे जलेगा। पहले श्री गणेश उपासना से पूजा आरंभ होगी। फ‍िर मां सहित सभी भगवानों को भोग लगाएंगे। अब माता को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त का पाठ करेंगे।

 

उसमें वर्णित ऋग्वैदिक श्री सूक्तं के 16 मंत्रों का तो बहुत महत्व है। इन मंत्रों से माता को प्रसन्न करके उनको घर में निवास करने की प्रार्थना करेंगे। साथ ही साथ श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ भी करेंगे। विष्णु पूजा भी आवश्यक है। इस दौरान ध्‍यान रखें क‍ि सुगंधित इत्र से पूरा घर महकता हो। सुगंधित धूप बत्ती भी जलाएंगे। अब श्री सूक्त के चमत्कारिक वैदिक मंत्रों से हवन करेंगे। अंत में माता की आरती करके प्रसाद का वितरण करेंगे।

 

 

 

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

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Karwa Chauth   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

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Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2018 Date time: 27 अक्टूबर को सुहागिने मनाएंगी करवा चौथ, जानें क्‍या है पूजा का शुभ मुहूर्त

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Karwa Chauth   |  तस्वीर साभार: Thinkstock

Karwa Chauth 2018 date time: करवा चौथ (Karwa Chauth) दिनांक 27 अक्टूबर 2018 दिन शनिवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराजल व्रत रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद उसे अर्ध्य देकर व्रत खोलती हैं। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी भी है। इस प्रकार यह पर्व और शुभ हो गया।

भारत में अनेक त्‍योहार मनाए जाते हैं जिसमें से करवा चौथ एक है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत पति के दीर्घायु के लिए रखा जाता है। एक बात का ख्याल रहे कि महिलाएं चांद को भी अर्ध्य देने के बाद पति के हाथों से ही जल पिएं। इस प्रकार पति पत्नी के जन्म जन्मांतर तक  चलने वाले इस अमर प्रेम में यह व्रत महती भूमिका निभाता है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज से जानें करवा चौथ का शुभ मुहूर्त एंव पूजा विधि।

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: 
05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 53 मिनट तक

कब खोलें व्रत:
चंद्रोदय यानी चांद के दिखने का समय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा। चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।

करवा चौथ की पूजा विधि: 
इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। सोलह श्रृंगार में माथे पर लंबी सिंदूर अवश्य हो क्योंकि यह पति की लंबी उम्र का प्रतीक है। मंगलसूत्र, मांग टीका, बिंदिया ,काजल, नथनी, कर्णफूल, मेहंदी, कंगन, लाल रंग की चुनरी, बिछिया, पायल, कमरबंद, अंगूठी, बाजूबंद और गजरा ये 16 श्रृंगार में आते हैं।

सोलह श्रृंगार में महिलाएं सज धजकर चंद्र दर्शन के शुभ मुहूर्त में चलनी से पति को देखती हैं। चंद्रमा को अर्ध्य देती हैं। चंद्रमा मन का और सुंदरता का प्रतीक है। महिलाएं चंद्रमा के समकक्ष सुंदर दिखना चाहती हैं क्योंकि आज वो अपने पति के लिए प्रेम की खूबसूरत चांद हैं। इससे पति का पत्नी के प्रति आकर्षण बढ़ता है। पति भी नए वस्त्र में सुंदर दिखने का प्रयास करता है। यह व्रत समर्पण का व्रत है। जीवात्मा महिला होती है। परमेश्वर पुरुष है। जो समर्पण एक भक्त का भगवान के प्रति होता है वैसा ही भाव आज पत्नी का पति के प्रति है।

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आध्यात्म/ज्योतिष

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Mahalaxmi Vrat 2018 Puja Vidhi

Mahalaxmi Vrat 2018: 17 सितंबर 2018 से आरम्भ होने वाले महालक्ष्मी व्रत का आज यानि 2 अक्टूबर का आखिरी दिन है। हिन्दू पंचांग के यह व्रत अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है।

धन की देवी मां लक्ष्‍मी का यह फलदायी व्रत पूरे 16 दिनों तक चलता है। यह व्रत काफी शुभ माना जा है क्‍योंकि इसे पूरे विधि विधान से रखने से घर में सुख शांति और धन की वर्षा होती है। मान्‍यता यह भी है कि इस व्रत को जो भी महिला रखती है उसके घर में कभी कलह नहीं होती।

महालक्ष्मी व्रत का महत्व:
इस व्रत को रखने से धन लाभ तो होता ही है साथ में परिवरजन की सेहत पर भी अच्‍छा असर पड़ता है। बहुत सी महिलाएं इसे पूरे 16 दिन रखती हैं मगर कुछ के लिए यह थोड़ा मुश्‍किल मामला होता है जिस कारण वह इसे मात्र 3 दिन के लिए रखती है। मगर व्रत का आखिरी दिन काफी महत्‍वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। इस व्रत में भोजन नहीं करना चाहिए बल्‍कि फल का सेवन करना चाहिए।

पूजा करने की विधि- 
इस व्रत की एक खास पूजा विधि है। इसमें सबसे पहले पूजा स्‍थान पर हल्‍दी से  कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। फिर मूर्ति के सामने श्रीयंत्र, सोने या चांदी के सिक्के तथा फल फूल रखें। इसके बाद मां लक्ष्‍मी के आठ रूपों का मंत्र जाप करते हुए उन पर कुंकुम, चावल और फूल चढ़ाते हुए पूजा करें।

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