आत्म आनंदित रहने में ही सुख है।धन तथा पद स्थिर नहीं है।जो स्थिर है हम उसको तलाशते नहीं।हमारी तृष्णाएं कभी पीछा नहीं छोड़ती हैं।इसलिए जो है उसी में खुशियों को सहेजना तथा संतृप्त रहकर श्री कृष्ण प्रेम में मस्त रहना ही जीवन का वास्तविक आनंद है।
मार्कण्डेय धाम में पंडित प्रेम गिरी जी का साधना और विश्राम कक्ष
ये है माता गंगा तथा गोमती के तट पर स्थित मार्कण्डेय धाम में पंडित प्रेम गिरी जी का साधना और विश्राम कक्ष।इस बार यहां मेरी एक पूजा थी।मैं सपरिवार था तो रुकना तो वाराणसी में हुआ लेकिन अपनी गाड़ी से हम प्रातः यहां पहुँच जाया करते थे।इस मंदिर से हमारा आत्मिक लगाव इतना अधिक है कि जब भी परिवार में कोई संकट आता है तो भोलेनाथ के दरबार में शरणागत हो जाते हैं।यहां रुद्राभिषेक तथा महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व है।संतान प्राप्ति तथा संतान की उन्नति की कामना भी भगवान मार्कण्डेय जी से की जाती है।आप लोग भी कभी यहां आकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।
Facebook कुछ कार्य बहुत अच्छा भी कर देता है
Facebook कुछ कार्य बहुत अच्छा भी कर देता है।इसने वर्षों बिछड़े हमारे कई दोस्तों को मिलाया।हमारे साथ बी एस सी में पढ़ीं मुदिता श्रीवास्तव से करीब 20वर्ष बाद आज मुलाकात हुई।मुदिता जी इस समय प्रयागराज में एक इंजीनियरिंग कालेज में प्रवक्ता हैं तथा उनके पति इंजीनियर हैं।आप लोगों से मुलाकात के बाद वर्षों पुरानी स्मृतियां मानस पटल पे पुनः अंकित हो गयीं।परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार की मृदुलता का जबाब नहीं।ईश्वर की कृपा बनी रहे।
गाय हमारी माता है
गाय हमारी माता है।सनातन धर्म में गो सेवा करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।सप्ताह में कम से कम एक दिन तो गोशाला जाएं हीं।जो लोग गो सेवा करते हैं वो भगवान कृष्ण के बहुत प्रिय होते हैं।जय श्री कृष्ण।
मेरी एम एस सी करते समय की फ़ोटो
मेरी एम एस सी करते समय की फ़ोटो हमारे मित्र डाक्टर अनिल जायसवाल जी ने भेजी है जो कि इस समय एक महाविद्यालय में मैथ्स के प्रवक्ता हैं।साथ में जय शिव प्रताप चंद जी।यह चित्र गोरखपुर विश्वविद्यालय के मैथ्स डिपार्टमेंट के सामने की है।
हरिशयनी एकादशी को व्रत
हरिशयनी एकादशी को व्रत रखने से कई जन्मों के पापों का शमन होता है।श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ बहुत फलदायी है।शनि से प्रभावित लोग भी ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें।आज के दैनिक जागरण के गोरखपुर के अंक में कई विद्वानों की राय जान सकते हैं।जय सियाराम




