परिवर्तन प्रकृति का अनिवार्य नियम है। आगत का स्वागत है।विगत का भी ऋण है।यह वर्ष हर्ष व विषाद दोनों का रहा।हमें कई बहुत अच्छे विद्वानों का सानिध्य व आशीर्वाद मिला वहीं मेरे कुछ अभिन्न मित्रों का असमय गुजर जाने का कष्ट मिला। इस वर्ष करीब मैंने एक हजार से ऊपर लेख देश की बड़ी पत्र पत्रिकाओं व पोर्टल के लिए लिखे।माता विंध्यवासिनी ने लाज रखी कि मीडिया में चुनाव सम्बन्धी लिखी मेरी सभी भविष्यवाणी एकदम शत प्रतिशत सही रही। इस वर्ष मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही मेरी सहनशीलता में वृद्धि।कई मोड़ ऐसे आए जब मैं बहुत कुछ बर्दाश्त करता रहा। एक बार तो बहुत कष्ट उस समय हुआ जब मेरे किसी अपने ने ही जिसे मैं भाई जैसा स्नेह दिया उसने ही बहुत असहनीय सी बाते कही ही नहीं बल्कि अपनी वाणी की मर्यादाओं को भी लांघ गए लेकिन मेरी सहनशीलता वहां भी विजयी रही।एक ही बात का मलाल रहा कि इस वर्ष मेरी पुस्तक पूर्ण नहीं हो पाई ।ज्यादा समय मीडिया लेखन के कारण इस वर्ष मेरी ज्योतिष की पुस्तक सम्पूर्ण नहीं हो पाई जिसकी भरपाई माता के आशीर्वाद से इस वर्ष कम से कम दो पुस्तक के सम्पूर्ण लेखन से करनी है। स्वास्थ्य का उतार चढ़ाव तो जीवन की प्रक्रिया है। मेरा यह वर्ष थोड़ा एकांत व ग्लैमर से दूर रहने का रहा।इस वर्ष धार्मिक पुस्तकें खूब पढ़ीं।गीता पर लिखी कई पुस्तकें पढ़ीं। युवा साहित्यकारों को पढ़ा।शिवपुराण व भागवत पर लिखे तमाम पुस्तकें पढ़ीं।इस वर्ष देश विदेश में मेरे संपर्क बढ़े।इसके पूर्व के वर्षों में राजनीतिज्ञों से संपर्क खूब रहते थे लेकिन इस वर्ष कुछ चुनिंदा राजनीतिक मित्र ही साथ थे ।हमने बहुत धन नहीं कमाया।मेरी आर्थिक स्थिति सामान्य ही रहती है लेकिन मेरे ऊपर माता की कृपा से इस वर्ष जब जब मैं संकट में आया मेरे मित्रो व शुभचिंतकों ने जो मेरा साथ दिया वो मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। मेरे पास संबंधों का धन है।
वर्ष 2019 में यदि जाने अनजाने में हमसे कोई भी गलती हुई हो या मेरे मन,वचन या कर्म से किसी को तनिक भी कष्ट हुआ हो तो वो हमको छमा करने की कृपा करेंगे।अलविदा 2019।जय सियाराम।जय माता विंध्यवासिनी।जय जय हनुमान।


