Loading...
loading

Category: Addhyatm

  • Home
  • Category: Addhyatm

अक्षय तृतीया : राश‍ि के अनुसार करें दान

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ द‍िन माना जाता है। इस द‍िन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है और दान व खरीदारी का भी महत्‍व है। यहां जानें राश‍ि के अनुसार आपको अक्षय तृतीया पर क्‍या करना चाहिए –

 akshay tritiya 2018 rashi ke anusar karein daan what to offer purchase on ausopicious day

तस्वीर साभार: Thinkstock

नई द‍िल्‍ली : अक्षय तृतीया साल 2018 में 18 अप्रैल को मनाई जा रही है। अक्षय तृतीया के लिए माना जाता है कि इस द‍िन बिना किसी मुहूर्त के कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। वैसे इस धारणा की भी एक खास वजह है। दरअसल, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में जब सूर्य और चन्द्रमा अपने उच्च प्रभाव में होते हैं और जब उनका तेज सर्वोच्च होता है, उस तिथि को हिन्दू पंचांग में बेहद शुभ माना जाता है। इस शुभ तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के द‍िन पूजा व व्रत का भी महत्‍व माना जाता है। हालांकि इस द‍िन दान देना सबसे ज्‍यादा पुण्‍य कमाने वाला बताया गया है। इस दान को गर्मी के मौसम के अनुसार देना श्रेयस्‍कर होता है। अक्षय तृतीया 2018 की खास बात ये है कि इस द‍िन पूरे 24 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा। अमूमन अक्षय तृतीया पर पंखे, छतरी, पानी, मिष्‍ठान, फल आद‍ि दान श्रेष्‍ठ माना गया है। साथ ही इस द‍िन सोने-चांदी की खरीदारी भी की जाती है।

हालांकि ये दान और खरीदारी अगर राश‍ि के अनुसार हो तो इसे ज्‍यादा मंगलकारी माना गया है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज से जानें अक्षय तृतीया पर किस राश‍ि को कैसे पूजन करना लाभकारी रहेगा और क्‍या खरीदने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी – 

मेष
श्री विष्णुसहस्त्रनाम के साथ साथ श्री हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ कीजिए। ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। मंदिर में गेहूं और मंगल से सम्बंधित द्रव्यों का दान करें।

Also Read : यह देवी है श‍िव जी की तीसरी पुत्री, पार्वती की कोख से नहीं हुआ जन्‍म

वृष
चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी गरीब अंधे व्यक्ति को अन्न और वस्त्र का दान करें।

मिथुन
बुध से सम्बंधित द्रव्यों का क्रय करें। वस्त्र खरीदें। शुक्र से सम्बंधित द्रव्य भी खरीद सकते हैं। चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। मूंग की दाल का दान करें। गरीबों में वस्त्र बाटें।

कर्क
चांदी और फूल के बर्तन खरीदें। शिव उपासना करें। रुद्राभिषेक कराएं। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। दुर्गासप्तशती का पाठ करें।

Also Read : पत्नी के पैर से जुड़े हैं पति के भविष्य के रहस्य, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

सिंह
स्वर्ण आभूषण खरीदें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। फूल का एक लोटा दान करें। गरीबों को भोजन कराएं।

कन्या
वस्त्र खरीदें। चांदी के सिक्के और बर्तन क्रय करें। श्री राम चरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें। वस्त्र का दान करें।

तुला
इस राशि के जातक चांदी के सिक्के लें। सफ़ेद और हरा वस्त्र खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी अंधे गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और वस्त्र का दान करें।

वृश्चिक
ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। गेहूं का दान करें। एक फूल का कोई पात्र मंदिर में दान करें।

Also Read : भारी आवाज, धार्मिक स्‍वभाव – जानें गुरु ग्रह से प्रभावित लोगों का व्‍यक्‍त‍ित्‍व

धनु
धार्मिक पुस्तक का दान करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें। चने की दाल का दान करें। श्रीरामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें।

मकर 
चांदी के आभूषण और सिक्के क्रय करें। वाहन खरीदने का शुभ संयोग है। श्री बजरंगबाण का पाठ करें। लोहे की बाल्टी किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।

कुंभ
श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। रुद्राभिषेक कराएं। लोहे का सामान और वाहन खरीदें। गरीबों में भोजन का वितरण करें।

मीन
धार्मिक पुस्तक का दान करें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें।

अक्षय तृतीया : राश‍ि के अनुसार करें दान

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ द‍िन माना जाता है। इस द‍िन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है और दान व खरीदारी का भी महत्‍व है। यहां जानें राश‍ि के अनुसार आपको अक्षय तृतीया पर क्‍या करना चाहिए –

 akshay tritiya 2018 rashi ke anusar karein daan what to offer purchase on ausopicious day

तस्वीर साभार: Thinkstock

नई द‍िल्‍ली : अक्षय तृतीया साल 2018 में 18 अप्रैल को मनाई जा रही है। अक्षय तृतीया के लिए माना जाता है कि इस द‍िन बिना किसी मुहूर्त के कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। वैसे इस धारणा की भी एक खास वजह है। दरअसल, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में जब सूर्य और चन्द्रमा अपने उच्च प्रभाव में होते हैं और जब उनका तेज सर्वोच्च होता है, उस तिथि को हिन्दू पंचांग में बेहद शुभ माना जाता है। इस शुभ तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के द‍िन पूजा व व्रत का भी महत्‍व माना जाता है। हालांकि इस द‍िन दान देना सबसे ज्‍यादा पुण्‍य कमाने वाला बताया गया है। इस दान को गर्मी के मौसम के अनुसार देना श्रेयस्‍कर होता है। अक्षय तृतीया 2018 की खास बात ये है कि इस द‍िन पूरे 24 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा। अमूमन अक्षय तृतीया पर पंखे, छतरी, पानी, मिष्‍ठान, फल आद‍ि दान श्रेष्‍ठ माना गया है। साथ ही इस द‍िन सोने-चांदी की खरीदारी भी की जाती है।

हालांकि ये दान और खरीदारी अगर राश‍ि के अनुसार हो तो इसे ज्‍यादा मंगलकारी माना गया है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज से जानें अक्षय तृतीया पर किस राश‍ि को कैसे पूजन करना लाभकारी रहेगा और क्‍या खरीदने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी – 

मेष
श्री विष्णुसहस्त्रनाम के साथ साथ श्री हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ कीजिए। ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। मंदिर में गेहूं और मंगल से सम्बंधित द्रव्यों का दान करें।

Also Read : यह देवी है श‍िव जी की तीसरी पुत्री, पार्वती की कोख से नहीं हुआ जन्‍म

वृष
चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी गरीब अंधे व्यक्ति को अन्न और वस्त्र का दान करें।

मिथुन
बुध से सम्बंधित द्रव्यों का क्रय करें। वस्त्र खरीदें। शुक्र से सम्बंधित द्रव्य भी खरीद सकते हैं। चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। मूंग की दाल का दान करें। गरीबों में वस्त्र बाटें।

कर्क
चांदी और फूल के बर्तन खरीदें। शिव उपासना करें। रुद्राभिषेक कराएं। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। दुर्गासप्तशती का पाठ करें।

Also Read : पत्नी के पैर से जुड़े हैं पति के भविष्य के रहस्य, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

सिंह
स्वर्ण आभूषण खरीदें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। फूल का एक लोटा दान करें। गरीबों को भोजन कराएं।

कन्या
वस्त्र खरीदें। चांदी के सिक्के और बर्तन क्रय करें। श्री राम चरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें। वस्त्र का दान करें।

तुला
इस राशि के जातक चांदी के सिक्के लें। सफ़ेद और हरा वस्त्र खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी अंधे गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और वस्त्र का दान करें।

वृश्चिक
ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। गेहूं का दान करें। एक फूल का कोई पात्र मंदिर में दान करें।

Also Read : भारी आवाज, धार्मिक स्‍वभाव – जानें गुरु ग्रह से प्रभावित लोगों का व्‍यक्‍त‍ित्‍व

धनु
धार्मिक पुस्तक का दान करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें। चने की दाल का दान करें। श्रीरामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें।

मकर 
चांदी के आभूषण और सिक्के क्रय करें। वाहन खरीदने का शुभ संयोग है। श्री बजरंगबाण का पाठ करें। लोहे की बाल्टी किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।

कुंभ
श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। रुद्राभिषेक कराएं। लोहे का सामान और वाहन खरीदें। गरीबों में भोजन का वितरण करें।

मीन
धार्मिक पुस्तक का दान करें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें।

अक्षय तृतीया : राश‍ि के अनुसार करें दान

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ द‍िन माना जाता है। इस द‍िन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है और दान व खरीदारी का भी महत्‍व है। यहां जानें राश‍ि के अनुसार आपको अक्षय तृतीया पर क्‍या करना चाहिए –

 akshay tritiya 2018 rashi ke anusar karein daan what to offer purchase on ausopicious day

तस्वीर साभार: Thinkstock

नई द‍िल्‍ली : अक्षय तृतीया साल 2018 में 18 अप्रैल को मनाई जा रही है। अक्षय तृतीया के लिए माना जाता है कि इस द‍िन बिना किसी मुहूर्त के कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। वैसे इस धारणा की भी एक खास वजह है। दरअसल, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में जब सूर्य और चन्द्रमा अपने उच्च प्रभाव में होते हैं और जब उनका तेज सर्वोच्च होता है, उस तिथि को हिन्दू पंचांग में बेहद शुभ माना जाता है। इस शुभ तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के द‍िन पूजा व व्रत का भी महत्‍व माना जाता है। हालांकि इस द‍िन दान देना सबसे ज्‍यादा पुण्‍य कमाने वाला बताया गया है। इस दान को गर्मी के मौसम के अनुसार देना श्रेयस्‍कर होता है। अक्षय तृतीया 2018 की खास बात ये है कि इस द‍िन पूरे 24 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा। अमूमन अक्षय तृतीया पर पंखे, छतरी, पानी, मिष्‍ठान, फल आद‍ि दान श्रेष्‍ठ माना गया है। साथ ही इस द‍िन सोने-चांदी की खरीदारी भी की जाती है।

हालांकि ये दान और खरीदारी अगर राश‍ि के अनुसार हो तो इसे ज्‍यादा मंगलकारी माना गया है। ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज से जानें अक्षय तृतीया पर किस राश‍ि को कैसे पूजन करना लाभकारी रहेगा और क्‍या खरीदने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी – 

मेष
श्री विष्णुसहस्त्रनाम के साथ साथ श्री हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ कीजिए। ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। मंदिर में गेहूं और मंगल से सम्बंधित द्रव्यों का दान करें।

Also Read : यह देवी है श‍िव जी की तीसरी पुत्री, पार्वती की कोख से नहीं हुआ जन्‍म

वृष
चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी गरीब अंधे व्यक्ति को अन्न और वस्त्र का दान करें।

मिथुन
बुध से सम्बंधित द्रव्यों का क्रय करें। वस्त्र खरीदें। शुक्र से सम्बंधित द्रव्य भी खरीद सकते हैं। चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। मूंग की दाल का दान करें। गरीबों में वस्त्र बाटें।

कर्क
चांदी और फूल के बर्तन खरीदें। शिव उपासना करें। रुद्राभिषेक कराएं। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। दुर्गासप्तशती का पाठ करें।

Also Read : पत्नी के पैर से जुड़े हैं पति के भविष्य के रहस्य, जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

सिंह
स्वर्ण आभूषण खरीदें। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। फूल का एक लोटा दान करें। गरीबों को भोजन कराएं।

कन्या
वस्त्र खरीदें। चांदी के सिक्के और बर्तन क्रय करें। श्री राम चरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें। वस्त्र का दान करें।

तुला
इस राशि के जातक चांदी के सिक्के लें। सफ़ेद और हरा वस्त्र खरीदें। श्री सूक्त का पाठ करें। किसी अंधे गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और वस्त्र का दान करें।

वृश्चिक
ताम्र पात्र खरीदें। स्वर्ण आभूषण क्रय करें। श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। गेहूं का दान करें। एक फूल का कोई पात्र मंदिर में दान करें।

Also Read : भारी आवाज, धार्मिक स्‍वभाव – जानें गुरु ग्रह से प्रभावित लोगों का व्‍यक्‍त‍ित्‍व

धनु
धार्मिक पुस्तक का दान करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें। चने की दाल का दान करें। श्रीरामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करें।

मकर 
चांदी के आभूषण और सिक्के क्रय करें। वाहन खरीदने का शुभ संयोग है। श्री बजरंगबाण का पाठ करें। लोहे की बाल्टी किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।

कुंभ
श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। रुद्राभिषेक कराएं। लोहे का सामान और वाहन खरीदें। गरीबों में भोजन का वितरण करें।

मीन
धार्मिक पुस्तक का दान करें। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। स्वर्ण आभूषण खरीदें।

अक्षय तृतीया 2018 : 24 घंटे मुहूर्त का संयोग

अक्षय तृतीया को बेहद शुभ द‍िन माना जाता है। जानें इस द‍िन का महत्‍व और उपाय जो आपको धन लाभ द‍िला सकता है –

akshay tritiya 2018 date time muhurat puja vidhi sanyog what not to do significance katha

अक्षय तृतीया के दिन दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता

नई द‍िल्‍ली : वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को ही अक्षय तृतीया कहते हैं। इस बार अक्षय तृतीया का महापर्व 18 अप्रैल को है। इस दिन मांगलिक कार्य, मुंडन, शादी विवाह, बहू का प्रथम बार चौका छूना, दूकान की ओपनिंग व्यापार का प्रारंभ और सारे शुभ कार्य किए जाते हैं। 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया सुबह 04:47 बजे से प्रारम्भ होगी और रात्रि 03:03 मिनट तक इसका मुहूर्त रहेगा। खास बात ये है कि इस वर्ष पूरे 24 घंटे का आपको शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है जो कि बहुत ही सौभाग्य की बात है।

यह माह गर्मी का होता है और माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता। उसका फल आपको इस जन्म के साथ साथ कई जन्मों तक मिलता रहता है। इस दिन लोगों को मीठा खिलाएं और शीतल जल पिलाएं। साथ ही गर्मी से बचने के ल‍िए जरूरतमंदों को छाता, घट और पंखे का दान करें। मंदिरों में वॉटर कूलर लगवाएं और भंडारा करवाते हुए मिठाई खिलाइएं। इससे आपको बहुत पुण्य की प्राप्ति होगी जिसका कभी क्षय नहीं होगा।

Also Read: शनिवार को भूलकर भी ना खरीदें ये 8 चीजें, पड़ेगी शन‍ि की कोप दृष्‍ट‍ि

ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज कहते हैं क‍ि अक्षय तृतीया को श्री विष्णु भगवान की पूजा माता लक्ष्मी के साथ साथ करना चाहिए। श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ और श्री सूक्त का पाठ जीवन में धन, यश, पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति कराएगा। अक्षय तृतीया की पूजा के ल‍िए भगवान विष्णु को पीला पुष्प अर्पित करें और पीला वस्त्र धारण कराके घी के 9 दीपक जलाकर पूजा प्रारम्भ करें। जो लोग बीमारियों से ग्रस‍ित हैं उनको आज के दिन आरी राम रक्षा स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

Also Read : हर दिन अलग-अलग ढंग से बांधें काला धागा, ऐसे करता है रक्षा

अक्षय तृतीया के द‍िन चांदी के सिक्के और स्वर्ण आभूषणों की खरीददारी करिए। नए वस्त्र धारण करिए और मंदिर में अन्न और फल का दान करिए। अस्पतालों में मीठा,जल और फल का वितरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन अपने मित्रों को और विद्वानों को धार्मिक पुस्तक का दान करने से देव गुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं। विद्यार्थियों को इस दिन कठिन परिश्रम का प्रतिज्ञा करना चाहिए। छात्रों को दृढ़ संकल्पित होकर आज ईश्वर के सामने यह संकल्प लेना चाहिए कि हम आज से कठिन परिश्रम करेंगे और माता पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ साथ गुरु का भी आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए क्योंकि माता, पिता और गुरु का आशीर्वाद आज के दिन अनंत गुना फलदायी होता है।

Also Read : कभी उठाए हैं सड़क पर गिरे पैसे, जानिए क्या होता है इसका अर्थ

इस दिन श्री रामचरितमानस के अरण्य काण्ड का पाठ करना चाहिए। इस काण्‍ड में भगवान राम ऋषियों और महान संतों को दर्शन देते हैं और उनके जन्म जन्मान्तर के पुण्य का फल प्रदान करते हैं। इस काण्ड का पाठ करने से भगवान श्री राम की भक्ति प्राप्त होती है। अक्षय तृतीया आपके लिए वह सुअवसर है जिससे आपके जीवन की दिशा और दशा ही तय हो जायेगी। इस दिन संकल्प लें कि हम कर्म की पराकाष्ठा और अपने जीवन में अच्छे कर्मों का समावेश करेंगे।

हनुमान जयंती 2018 : 30 साल बाद बना शनि का ये अनोखा योग

चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म होने के कारण इसी दिन श्री हनुमान जयंती मनाते हैं। वहीं, महावीर हनुमान को महाकाल शिव का 11वां रुद्रावतार माना गया है।

hanuman jayanti ke upay date time puja vidhi niyam

भगवान हनुमान |तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली.  31 मार्च को भक्ति के पर्याय और श्री राम दूत तथा संकटों को पल भर में दूर करने वाले श्रो हनुमान जी की जयंती है।  माना जाता है कि श्री हनुमान ही मातंग ऋषी के शिष्य थे। सूर्य देव और नारद जी से भी इन्होनें कई गूढ़ विद्याएं सीखीं। चैत्र माह की पूर्णिमा को ही हनुमान जी का जन्म होने के कारण इसी दिन श्री हनुमान जयंती मनाते हैं। वहीं, महावीर हनुमान को महाकाल शिव का 11वां रुद्रावतार माना गया है।

इस साल हनुमान जयंती के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके स्वामी सूर्य नारायण हैं। 18 मार्च से हिंदू नववर्ष का आरंभ हुआ है, जिसके राजा सूर्य और मंत्री उनके पुत्र शनि हैं। 2018 में शनिवार के दिन हनुमान जयंती आने से इसके प्रभाव में वृद्धि हुई है। वर्तमान समय में शनि धनु राशि में और मंगल मकर राशि में वास कर रहे हैं। हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर शनि-मंगल का ये योग 30 वर्ष उपरांत बना है। इस योग में किए गए उपाय शीघ्र अपना प्रभाव दिखाते हैं और जातक को अक्षय पुण्य प्राप्त होते हैं।

Shani Dev

Read: हनुमान जयंती 2018 : ये है मुहूर्त, पूजा में भूलकर भी ना करें ये गलतियां

इन मंत्रों का करें जाप 
भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र है-  ॐ हं हनुमते नम:।। वहीं, सर्व बाधाओं से मुक्ति हेतु! द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र है- ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट।। वहीं, मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए मंत्र है- महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।। शत्रुओं और रोगों पर विजय पाने के लिए- ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।। संकट दूर करने का हनुमान मंत्र : ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।।

hanuman jayanti

Also Read : हनुमान जी के थे 5 भाई, ये है उनका पूरा पर‍िवार

क्‍या है हनुमान जयंती 2018 का मुहूर्त 
ज्‍योतिष के जानकार सुजीत महाराज बताते हैं क‍ि हनुमान जयंती 30 मार्च को सायंकाल 07:35 से 31 को शाम 06:06 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि 31 को होने के कारण पूर्णिमा 31 को ही मनाई जाएगी और उसी दिन पूरी रात्रि और पूरा दिन श्री हनुमान जयंती मनाई जाती है। 31की रात्रि को पूजा का विशेष फल है क्योंकि चैत्र पूर्णिमा की रात्रि में ही हनुमान जयंती मनाने का प्रावधान है।

Navratri में होती है तंत्र साधना

नवरात्र के द‍िनों में तंत्र साधना भी होती है। शक्‍त‍ि की महिमा से भरे इन द‍िनों में जानें किन मंत्रों का होता है जाप और किस नवरात्र की रात में मंत्र होते हैं स‍िद्ध –

tantra sadhna during navratri durga kali matangi baglamukhi riddhi siddhi black magic puja interesting facts hindi

तस्वीर साभार: BCCL

नई द‍िल्‍ली : Navratri नवरात्र में शक्ति उपासना के तौर पर माता दुर्गा की उपासना की जाती है। महा काली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती के रूप में साधक अपने विभिन्न इष्ट के रूप में माता की पूजा अर्चना करते हैं। माता काली की पूजा भी साधक इस समय बहुत तेज कर देते हैं ताकि तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त हो सकें। मां बंगलामुखी उपासना की जाती है। बहुत से राजनीतिज्ञ राजनीति में सफलता की प्राप्ति हेतु इस समय बंगलामुखी अनुष्ठान विधिवत करवाते हैं।

इन्‍हीं द‍िनों में साबर मंत्र की सिद्धि भी की जाती है। वहीं अष्टमी की रात्रि में दुर्गासप्तशती के प्रत्येक मंत्र को विधिवत सिद्ध किया जाता है। सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ का 108 बार अष्टमी की रात्रि में पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। त्रिक मंत्रों में ग्रहों के बीज मंत्र के तांत्रिक प्रयोग भी होते हैं। नव ग्रहों की लकड़ियों से हवन करके नवों ग्रहों को प्रसन्न किया जाता है। महामृत्युंजय मंत्र की साधना भी की जाती है। इस मंत्र के साथ साथ लघु मृत्युंजय मंत्र की साधना भी की जाती है।

Also Read : जानें नवरात्र‍ि के दौरान क्‍यों होती है श्रीराम की भी पूजा

मां मातंगी की साधना 
ज्‍योति‍षाचार्य सुजीत महाराज कहते हैं क‍ि तांत्रिक साधनाओं में एक दुर्लभ साधना होती है मातंगी साधना। मातंगी देवी श्यामवर्ण और त्रिनयन धारिणी हैं और रत्नजटित सिंघासन पर विराजमान हैं
ये है मातंगी मंत्र –
ॐ ह्लीं क्लीं हूँ मातङ्गी फट्ट स्वाहा।

इस मंत्र की 6000 की जप संख्या होती है। दशांश हवन घी, शर्करा और मधुमिश्रित ब्रम्हवृक्ष की समिधा से हवन करना चाहिए। इस साधना का उद्देश्य धन तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। वहीं कमला स्तोत्र का पाठ करके हवन करें।

Also Read : नवरात्र में भाग्‍य को जगाएं, करें नवग्रहों के ये उपाय 

Also Read : Navratri 2018 : ये हैं नवरात्र‍ि के वास्‍तु उपाय, शुभ फल के लिए जरूर आजमाएं 

जानें ये तांत्र‍िक साधनाएं भी 
एक अदभुत तांत्रिक साधना होती है अष्टनायिका साधना जिसे अर्धरात्रि में सिद्ध करते हैं। इसके अलावा एक और सरल साधना है –
ॐ नमः शान्ते प्रशांते ॐ ह्लीं हां सर्व क्रोध प्रश्मनी स्वाहा।
पीपल के वृक्ष के नीचे माता की मूर्ति रखके या अपने घर के मंदिर में मात्र 21 बार इस मंत्र को पढ़ देने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मन के विकार नष्ट होते हैं। इस मंत्र की साधना आसान है और इसका जाप कोई भी कर सकता है।

इस प्रकार कई तांत्रिक मंत्रों के प्रयोग के साथ साथ नव ग्रह के यंत्र,वीसा यंत्र जो कि बहुत पावरफुल होता है और महामृत्युंजय यंत्र यदि नवरात्र में बनाए जाते और सिद्ध किए जाते हैं। बंगलामुखी यंत्र और चौतीसा यंत्र भी नवरात्र में बनाए  जाते हैं।

नवरात्र‍ि में क्‍यों होता है कन्‍या पूजन

नवरात्रि जब समापन की ओर आती हैं तब कन्‍या पूजन किया जाता है। अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर होने वाले इस पूजन के बारे में जानें ये खास बातें…

Navratri kanya ashtami pujan kanjak vidhi Chaitra Shardiya navratri kaise karte hain kanya pujan

मान्‍यता है कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती |तस्वीर साभार: BCCL

नई द‍िल्‍ली : नवरात्र‍ि के नौ द‍िन जहां मां के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं इनके समापन पर कन्‍या पूजन करने की परंपरा है। इसका एक प्रचलित नाम कंजक भी है और इसे अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर किया जाता है। इस द‍िन छोटी बच्‍च‍ियों को देवी का रूप मान कर पूजा जाता है। साथ ही इनके चरण छूकर आशीर्वाद ल‍िया जाता है। माना जाता है क‍ि उनका आशीर्वाद मां की कृपा लेकर आता है। इसलिए जो लोग नवरात्र में व्रत नहीं भी रखते, वे भी कन्‍या पूजन जरूर करते हैं।

कन्‍या पूजन के साथ ही जरूरी है कि इसे पूरी व‍िध‍ि से किया जाए और इसके ल‍िए बनाए गए न‍ियमों का ध्‍यान रखा जाए। ऐसा न करने पर मां रुष्‍ट हो सकती हैं। कन्‍या पूजन की शुरुआत कन्‍याओं के चरण धोने से होती है। इसके बाद उनको भोजन भी पूरी श्रद्धा से कराना चाहिए। साथ ही उनसे आशीर्वाद भी झुककर लेना चाहिए। सत्य और समर्पण भाव से उनको माता ही मानकर उनके आशीर्वाद को स्वीकार करने की परंपरा चली आ रही है।

 

 

Read: Navratri 2018 : ये हैं मां दुर्गा के 32 नाम, बना देंगे सभी बिगड़े काम

जानें Navratri में Kanya Pujan की सही व‍िधि
सुजीत महाराज कहते हैं कि कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती है। नवरात्र शक्ति उपासना का पर्व है।देवी पूजा के साथ साथ प्रतीक रूप में कन्या को देवी मानके उनके चरणों का पूजन करने से माता शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कंजक में 9 कन्‍याओं को जरूर बैठाएं।

  • सर्वप्रथम कन्याओं का चरण फूल की थाली में जल में डालकर उसको धोएं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से पापों का शमन होता है।
  • फिर उनको तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें।
  • इसके पश्चात नई थाली (इसलिए कंजक में अक्‍सर थाली या टिफ‍िन द‍िया जाता है) में कन्‍याओं को पूड़ी, हलवा, चना इत्यादि भोजन श्रद्धा पूर्वक परोसें। फिर मिष्ठान और प्रसाद देकर कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान करें।
  • जब कन्‍याएं भोजन कर लें तो उन्‍हें शक्तिस्वरूपा देवी मानकर पुनः उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

Also Read : Navratri में मर्दों को नहीं बनानी चाहिए दाढ़ी, इन कामों से भी होती हैं मां नाराज

Also Read : जानें नवरात्र‍ि के दौरान क्‍यों होती है श्रीराम की भी पूजा

नवरात्र में जलाएं अखंड ज्‍योति 
नवरात्रों में नौ दिनों तक देवी माता जी का विशेष श्रृंगार करना चाहिए। चोला, फूलों की माला, हार और नए कपड़ों से माता जी का श्रृंगार किया जाता है। वहीं नवरात्र में देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलाना मां भगवती को बहुत प्रसन्न करने वाला कार्य होता है। लेकिन अगर गाय का घी नहीं है तो अन्य घी से माता की अखंड ज्योति पूजा स्थान पर जरूर जलानी चाहिए।

नवरात्र‍ि में क्‍यों होता है कन्‍या पूजन

नवरात्रि जब समापन की ओर आती हैं तब कन्‍या पूजन किया जाता है। अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर होने वाले इस पूजन के बारे में जानें ये खास बातें…

Navratri kanya ashtami pujan kanjak vidhi Chaitra Shardiya navratri kaise karte hain kanya pujan

मान्‍यता है कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती |तस्वीर साभार: BCCL

नई द‍िल्‍ली : नवरात्र‍ि के नौ द‍िन जहां मां के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं इनके समापन पर कन्‍या पूजन करने की परंपरा है। इसका एक प्रचलित नाम कंजक भी है और इसे अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर किया जाता है। इस द‍िन छोटी बच्‍च‍ियों को देवी का रूप मान कर पूजा जाता है। साथ ही इनके चरण छूकर आशीर्वाद ल‍िया जाता है। माना जाता है क‍ि उनका आशीर्वाद मां की कृपा लेकर आता है। इसलिए जो लोग नवरात्र में व्रत नहीं भी रखते, वे भी कन्‍या पूजन जरूर करते हैं।

कन्‍या पूजन के साथ ही जरूरी है कि इसे पूरी व‍िध‍ि से किया जाए और इसके ल‍िए बनाए गए न‍ियमों का ध्‍यान रखा जाए। ऐसा न करने पर मां रुष्‍ट हो सकती हैं। कन्‍या पूजन की शुरुआत कन्‍याओं के चरण धोने से होती है। इसके बाद उनको भोजन भी पूरी श्रद्धा से कराना चाहिए। साथ ही उनसे आशीर्वाद भी झुककर लेना चाहिए। सत्य और समर्पण भाव से उनको माता ही मानकर उनके आशीर्वाद को स्वीकार करने की परंपरा चली आ रही है।

 

 

Read: Navratri 2018 : ये हैं मां दुर्गा के 32 नाम, बना देंगे सभी बिगड़े काम

जानें Navratri में Kanya Pujan की सही व‍िधि
सुजीत महाराज कहते हैं कि कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती है। नवरात्र शक्ति उपासना का पर्व है।देवी पूजा के साथ साथ प्रतीक रूप में कन्या को देवी मानके उनके चरणों का पूजन करने से माता शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कंजक में 9 कन्‍याओं को जरूर बैठाएं।

  • सर्वप्रथम कन्याओं का चरण फूल की थाली में जल में डालकर उसको धोएं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से पापों का शमन होता है।
  • फिर उनको तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें।
  • इसके पश्चात नई थाली (इसलिए कंजक में अक्‍सर थाली या टिफ‍िन द‍िया जाता है) में कन्‍याओं को पूड़ी, हलवा, चना इत्यादि भोजन श्रद्धा पूर्वक परोसें। फिर मिष्ठान और प्रसाद देकर कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान करें।
  • जब कन्‍याएं भोजन कर लें तो उन्‍हें शक्तिस्वरूपा देवी मानकर पुनः उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

Also Read : Navratri में मर्दों को नहीं बनानी चाहिए दाढ़ी, इन कामों से भी होती हैं मां नाराज

Also Read : जानें नवरात्र‍ि के दौरान क्‍यों होती है श्रीराम की भी पूजा

नवरात्र में जलाएं अखंड ज्‍योति 
नवरात्रों में नौ दिनों तक देवी माता जी का विशेष श्रृंगार करना चाहिए। चोला, फूलों की माला, हार और नए कपड़ों से माता जी का श्रृंगार किया जाता है। वहीं नवरात्र में देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलाना मां भगवती को बहुत प्रसन्न करने वाला कार्य होता है। लेकिन अगर गाय का घी नहीं है तो अन्य घी से माता की अखंड ज्योति पूजा स्थान पर जरूर जलानी चाहिए।

नवरात्र‍ि में क्‍यों होता है कन्‍या पूजन

नवरात्रि जब समापन की ओर आती हैं तब कन्‍या पूजन किया जाता है। अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर होने वाले इस पूजन के बारे में जानें ये खास बातें…

Navratri kanya ashtami pujan kanjak vidhi Chaitra Shardiya navratri kaise karte hain kanya pujan

मान्‍यता है कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती |तस्वीर साभार: BCCL

नई द‍िल्‍ली : नवरात्र‍ि के नौ द‍िन जहां मां के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं इनके समापन पर कन्‍या पूजन करने की परंपरा है। इसका एक प्रचलित नाम कंजक भी है और इसे अष्‍टमी या फ‍िर नवमी पर किया जाता है। इस द‍िन छोटी बच्‍च‍ियों को देवी का रूप मान कर पूजा जाता है। साथ ही इनके चरण छूकर आशीर्वाद ल‍िया जाता है। माना जाता है क‍ि उनका आशीर्वाद मां की कृपा लेकर आता है। इसलिए जो लोग नवरात्र में व्रत नहीं भी रखते, वे भी कन्‍या पूजन जरूर करते हैं।

कन्‍या पूजन के साथ ही जरूरी है कि इसे पूरी व‍िध‍ि से किया जाए और इसके ल‍िए बनाए गए न‍ियमों का ध्‍यान रखा जाए। ऐसा न करने पर मां रुष्‍ट हो सकती हैं। कन्‍या पूजन की शुरुआत कन्‍याओं के चरण धोने से होती है। इसके बाद उनको भोजन भी पूरी श्रद्धा से कराना चाहिए। साथ ही उनसे आशीर्वाद भी झुककर लेना चाहिए। सत्य और समर्पण भाव से उनको माता ही मानकर उनके आशीर्वाद को स्वीकार करने की परंपरा चली आ रही है।

 

 

Read: Navratri 2018 : ये हैं मां दुर्गा के 32 नाम, बना देंगे सभी बिगड़े काम

जानें Navratri में Kanya Pujan की सही व‍िधि
सुजीत महाराज कहते हैं कि कन्‍या पूजन के बिना नवरात्रि पूजा के फल की प्राप्‍ति नहीं होती है। नवरात्र शक्ति उपासना का पर्व है।देवी पूजा के साथ साथ प्रतीक रूप में कन्या को देवी मानके उनके चरणों का पूजन करने से माता शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कंजक में 9 कन्‍याओं को जरूर बैठाएं।

  • सर्वप्रथम कन्याओं का चरण फूल की थाली में जल में डालकर उसको धोएं। मान्‍यता है कि ऐसा करने से पापों का शमन होता है।
  • फिर उनको तिलक लगाकर पंक्तिबद्ध बैठाएं। हाथ में रक्षासूत्र बांधें और उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें।
  • इसके पश्चात नई थाली (इसलिए कंजक में अक्‍सर थाली या टिफ‍िन द‍िया जाता है) में कन्‍याओं को पूड़ी, हलवा, चना इत्यादि भोजन श्रद्धा पूर्वक परोसें। फिर मिष्ठान और प्रसाद देकर कुछ द्रव्य और वस्त्र का दान करें।
  • जब कन्‍याएं भोजन कर लें तो उन्‍हें शक्तिस्वरूपा देवी मानकर पुनः उनकी आरती करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।

Also Read : Navratri में मर्दों को नहीं बनानी चाहिए दाढ़ी, इन कामों से भी होती हैं मां नाराज

Also Read : जानें नवरात्र‍ि के दौरान क्‍यों होती है श्रीराम की भी पूजा

नवरात्र में जलाएं अखंड ज्‍योति 
नवरात्रों में नौ दिनों तक देवी माता जी का विशेष श्रृंगार करना चाहिए। चोला, फूलों की माला, हार और नए कपड़ों से माता जी का श्रृंगार किया जाता है। वहीं नवरात्र में देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलाना मां भगवती को बहुत प्रसन्न करने वाला कार्य होता है। लेकिन अगर गाय का घी नहीं है तो अन्य घी से माता की अखंड ज्योति पूजा स्थान पर जरूर जलानी चाहिए।

गायत्री जयंती पर जरूर करें ये 14 काम, दूर होंगे सभी कष्‍ट और जीवन में आएंगी खुशियां

 

gayti mantra

गायत्री जयंती ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनायी जाती है। यह गंगा दशहरा के अगले दिन मनायी जाती है। इस दिन कुछ ऐसे खास काम जरूर करने चाहिये, जिससे मां गायत्री खुश होती हैं और कष्‍टों को दूर करती हैं।

 Gayatri Jayanti

Gayatri Jayanti |तस्वीर साभार: BCCL

सुजीत महाराज/नई द‍िल्‍ली : गायत्री जयंती ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनायी जाती है जो प्रायः गंगा दशहरा के अगले दिन मनायी जाती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन भी यह पर्व मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह की एकादशी शुक्रवार 25 मई 2018 को है।

गायत्री माता माँ गायत्री प्रज्ञा की देवी हैं। गायत्री जी का वाहन हंस है। मां गायत्री व्‍यक्‍ती के अदंर विवे को जागृत कर के अच्‍छे और बुरे का ज्ञान करवाती हैं। यह में सच्‍चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। मां गायत्री के एक हाथ में पुस्‍तक और दूसरे हाथ में कमण्डल होता है। गायत्री मंत्र सबसे बड़ा मंत्र होता है। इसकी महिमा को सभी शास्त्रों, संप्रदायों और ऋषि-मुनियों ने एक स्वर में स्वीकार्य की है। गायत्री जयंती के दिन यदि पूरा फल पाना है तो गायत्री जयंती के दिन कुछ ऐसे काम करें जिससे उसका पूरा फल मिले।

Also read: Ganga Dussehra 2018: जानें क्‍या है इसका महत्‍व और कैसे करें पूजा 

गायत्री जयन्ती को क्या करें

1. गायत्री मन्त्र का जप करके हवन करें।
2. सूर्य पूजा करें।
3. श्री आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें।
4. अन्न का दान करें।
5. गुड़ और गेहूं का दान करें।
6. पवित्र नदी में स्नान करें।
7. धार्मिक पुस्तक का दान करें।
8. इस दिन भंडारा करायें। लोगों को शीतल जल पिलायें।घर की छत पे  जल से भरा पात्र रखें जिससे चिड़ियों के कंठ तृप्त हो सकें।
9. सत्य बोलनें का प्रयास करें।
10.  फलाहार व्रत रहें।
11. किसी से कटु वाणी का प्रयोग मत करें।
13 .सूर्य के बीज मन्त्र का जप आपको प्रतिष्ठा दिलाएगा।
14. सूर्य पिता का कारक ग्रह है। पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

Also read: Padmini Ekadashi 2018 – पुरुषोत्तम मास में होने वाले पद्मिनी एकादशी में क्‍या करें और क्‍या नहीं 

इस प्रकार गायत्री जयंती बहुत महत्वपूर्ण है।भगवान कृष्ण ने गीता में मंत्रों में अपने आपको गायत्री कहा है।अतः यह जयंती पुण्य प्राप्ति का महान अवसर प्रदान करती है।

Recent Posts

Archives

Categories

Tags

15 जनवरी को मकर संक्रांति Astro Facebook कुछ कार्य बहुत अच्छा भी कर देता है Meditation moon-eclipse Numerology Spiritual significance of Shravan month-- sujeet jee maharaj on india voice tv Tarot Vedicastrology Virgo Zodiac अग्रज श्री जितेंद्र त्रिपाठी सर को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं अयोध्या महोत्सव में आध्यात्मिक लेखन के लिए सम्मान आत्म आनंदित रहने में ही सुख इन राश‍ियों के ल‍िए ला रहा है कष्‍ट उपच्छाया चन्द्रग्रहण कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।मेरे लिखे पूरे लेख को पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में कार्तिक पूर्णिमा की बहुत शुभकामनाएं।आज मेरे लिखे वक्तव्य को पढ़ सकते हैं दैनिक जागरण में। कार्त‍िक पूर्ण‍िमा पर साल का आख‍िरी चंद्र ग्रहण काशी के विद्वान अनुज ज्योतिषियों व तांत्रिकों के साथ खग्रास चन्द्र ग्रहण दिनांक 08 नवम्बर को--सुजीत जी महाराज- गाय हमारी माता है चन्द्र ग्रहण का राशियों पर प्रभाव व दान-- चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से आरम्भ होगा जन्मकुंडली डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह जी को जन्मदिन की अनंत तथा अशेष शुभकामनाएं तीज 2 सितंबर को ही मनाना उचित रहेगा तुम हकीकत दीपावली 24 अक्टूबर पूजा का शुभ मुहूर्त-- धनतेरस पर राशि अनुरूप करें खरीदारी। पायनियर में मकर संक्रांति में उदया तिथि ली जाती है मार्कण्डेय धाम में पंडित प्रेम गिरी जी का साधना और विश्राम कक्ष मेरा लेख पढ़ें राष्ट्रीय सहारा में। रहीस मीडिया का सलाहकर बनाने के लिए बहुत बधाई लोगों की प्रगति देखकर बहुत प्रसन्नता वट वृक्ष की पूजा शिव मंदिर में रुद्राभिषेक श्राद्ध के अगले दिन से नवरात्रि पूजा नहीं कर पाएंगे।लगेगा पुरुषोत्तम मास श्री राम कथा संतकबीरनगर की जिलाधिकारी दिव्या मित्तल जी को पुस्तक भेंट करते हुए।साथ में गुरुदेव डॉक्टर हरिद्वार शुक्ल जी सुजीत जी महाराज हरिशयनी एकादशी को व्रत होली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं

Download The App Now!

Google Play App Store

recent